जिला मंडी में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) द्वारा आयोजित किसान मेला प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। यह कार्यक्रम ग्राम पंचायत धिस्ती, तहसील चच्योट में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की।
इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति के प्रति जागरूक करना और उन्हें रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित करना था। बदलते समय में जहां खेती की लागत बढ़ती जा रही है, वहीं प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक सस्ता, सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लाल सिंह कौशल उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया और इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणाली बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकती है।
इस अवसर पर कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की प्रमुख तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इनमें जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसी विधियों का उपयोग कैसे किया जाए, इस पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। इन तकनीकों के माध्यम से किसान बिना रासायनिक खाद के भी अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में काफी कमी आती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके अलावा, इससे तैयार होने वाले खाद्य उत्पाद स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होते हैं, जिससे बाजार में उनकी मांग भी बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को प्रमुख फसलों जैसे गेहूं, मक्का और हल्दी के नवीनतम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की जानकारी भी दी गई। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और वे बाजार में बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
इस किसान मेले में कुल 470 किसानों ने भाग लिया, जो इस कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है। बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी यह संकेत देती है कि अब किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाने के लिए भी तैयार हैं।
कार्यक्रम में जिला स्तरीय किसान सलाहकार समिति के सदस्य हीर सिंह ठाकुर, 20 सूत्रीय कार्यक्रम के सदस्य दीप मणि, आत्मा मंडी के उप परियोजना निदेशक संजय कुमार ठाकुर और डॉ. हितेन्द्र ठाकुर सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इसके अलावा एसएमएस कृषि गगन प्रदीप सैनी, विद्युत विभाग के कार्यकारी अभियंता सुमेश चौहान, जल शक्ति विभाग के एसडीओ किशोर लाल, उद्यान विकास अधिकारी डॉ. काजल शर्मा, पशु चिकित्सक डॉ. राकेश शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
इस प्रकार के आयोजनों से किसानों को नई जानकारी और तकनीकों से जोड़ने में मदद मिलती है। साथ ही, यह मंच किसानों और विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करने का भी अवसर प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, मंडी में आयोजित यह किसान मेला न केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में सफल रहा, बल्कि इसने किसानों को एक नई दिशा भी दिखाई। आने वाले समय में इस तरह के प्रयास किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
