पान से बनी चॉकलेट से लड्डू तक, महोबा का अनोखा स्टार्टअप

rakesh nandan

28/03/2026

शिमला के पीटरहॉफ होटल में चल रहे जीआई महोत्सव में इस बार एक अनोखा स्टार्टअप लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आपको पान के पत्ते से बनी सिर्फ पारंपरिक मीठी पान ही नहीं, बल्कि चॉकलेट, माउथ फ्रेशनर, गुलकंद, लड्डू और कई अन्य उत्पाद भी देखने और चखने को मिल रहे हैं। यह अनोखा प्रयोग उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा जिले के एक छोटे से गांव मलकपुरा से शुरू हुआ है, जहां एक भाई-बहन की जोड़ी ने पारंपरिक पान को आधुनिक उत्पादों में बदलकर स्वरोजगार की मिसाल पेश की है।

🌿 पान से बना स्टार्टअप “Betelyfe”

इस स्टार्टअप की शुरुआत वर्ष 2023 में अच्युत्यम ऑर्गेनिक एंड हर्बल कंपनी के तहत की गई। इसके अंतर्गत “Betelyfe” ब्रांड के जरिए महोबा देशावरी पान के पत्तों से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल की अगुवाई मयंकिता चौरसिया और उनके भाई चित्रांश चौरसिया कर रहे हैं। मयंकिता ने इतिहास में एमए करने के बाद यूजीसी नेट पास किया और पीएचडी में प्रवेश लिया, लेकिन उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़कर अपने पारंपरिक व्यवसाय को नया रूप देने का निर्णय लिया। वहीं उनके भाई ने बीकॉम और न्यूट्रिशन हेल्थ में डिप्लोमा किया है।

🍫 पान से तैयार किए जा रहे अनोखे उत्पाद

Betelyfe के तहत कई नवाचार किए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • पान चॉकलेट
  • पान शरबत
  • हनी मिश्री पान गुलकंद
  • मिश्री पान गुलकंद
  • पान बीड़ा
  • पान डेट्स और चोको पान डेट्स
  • पान के लड्डू

इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और अब ये देशभर में बेचे जा रहे हैं। मयंकिता बताती हैं कि उनके उत्पाद न केवल स्वाद में अनोखे हैं, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित भी रहते हैं—जैसे पान चॉकलेट एक साल तक उपयोग योग्य रहती है।

👨‍👩‍👧‍👦 परिवार की विरासत से बना ब्रांड

मयंकिता और चित्रांश का परिवार पीढ़ियों से पान की खेती करता आ रहा है। उनके पिता राज कुमार चौरसिया ने महोबा देशावरी पान को जीआई टैग दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया। आखिरकार वर्ष 2021 में इस पान को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान देशभर में बढ़ी और इसी ने इस स्टार्टअप की नींव रखी।

📈 रोजगार और खेती को मिला बढ़ावा

इस स्टार्टअप के माध्यम से अब तक 50 से अधिक लोगों को नियमित रोजगार मिल चुका है। मयंकिता के अनुसार, पहले जहां पान की खेती केवल 25% क्षेत्र में होती थी, अब यह बढ़कर 35% हो गई है। उनका लक्ष्य इसे 80% तक पहुंचाना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की आजीविका मजबूत हो सके।

🧴 अब स्किन केयर प्रोडक्ट भी तैयार

इस स्टार्टअप ने पान के पत्तों से स्किन केयर उत्पाद भी विकसित किए हैं, जिनका पेटेंट कार्य जारी है। जल्द ही इन्हें बाजार में लॉन्च किया जाएगा। साथ ही, ये उत्पाद इंस्टाग्राम आईडी “Betelyfe” के माध्यम से देश-विदेश में भी बेचे जा रहे हैं।

🏆 मिला राज्यपाल सम्मान

मयंकिता को उनके इस नवाचार और उद्यमिता के लिए “राज्यपाल चल वैजयंती पुरस्कार” से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान आनंदीबेन पटेल द्वारा प्रदान किया गया।

📍 जीआई महोत्सव में आकर्षण का केंद्र

शिमला में चल रहे इस महोत्सव में पहली बार स्टॉल लगाने पहुंचे चित्रांश चौरसिया ने बताया कि लोगों को उनके उत्पाद बेहद पसंद आ रहे हैं और उन्हें देशभर की प्रदर्शनियों में बुलाया जाता है। यह महोत्सव 29 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है, जहां लोग इन अनोखे उत्पादों का अनुभव कर सकते हैं।


🌿 महोबा देशावरी पान: 1000 साल पुरानी विरासत

बुंदेलखंड क्षेत्र का महोबा देशावरी पान सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक विरासत है, जिसकी शुरुआत चंदेल काल से मानी जाती है।

⭐ इसकी खासियत

  • बिल्कुल बिना रेशा (Fiber)
  • मुंह में जाते ही घुल जाता है
  • हल्का मीठा और प्रीमियम स्वाद
  • कुरकुरापन इसकी पहचान

🌱 खेती की चुनौती

इसकी खेती ‘बरेजा’ नामक संरचना में की जाती है, जिसमें तापमान और नमी का विशेष ध्यान रखा जाता है।

🩺 स्वास्थ्य लाभ

आयुर्वेद के अनुसार यह—

  • पाचन में सहायक
  • मुंह की दुर्गंध दूर करता है
  • वात-पित्त-कफ संतुलन में मदद करता है

🔍 निष्कर्ष

महोबा का यह स्टार्टअप दिखाता है कि अगर पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक सोच से जोड़ा जाए, तो छोटे गांव से भी बड़े स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। पान जैसे पारंपरिक उत्पाद को चॉकलेट और लड्डू में बदलना न केवल नवाचार है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम भी है।