नाहन में लाल चंद प्रार्थी जयंती समारोह आयोजित

rakesh nandan

08/04/2026

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा जिला सिरमौर के नाहन स्थित बचत भवन में महान साहित्यकार लाल चंद प्रार्थी की राज्य स्तरीय जयंती समारोह बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रदेश भर से साहित्यकार, शोधकर्ता और कवि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल प्रार्थी जी के साहित्यिक योगदान को याद किया, बल्कि हिमाचली संस्कृति और काव्य परंपरा को भी नई दिशा देने का प्रयास किया।

कार्यक्रम में पद्मश्री विद्यानन्द सरैक ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि अध्यक्षता जिला सिरमौर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश राही ने की। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मस्तराम शर्मा, अनिल हार्टा, मोहन ठाकुर, स्वतंत्र कौशल और कांता नेगी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अपने विचारों के माध्यम से प्रार्थी जी के साहित्यिक योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया।

समारोह का प्रथम सत्र शोधपत्र वाचन पर केंद्रित रहा। इसमें युवा साहित्यकार आचार्य सुरेश शर्मा भारद्वाज ने “लाल चंद प्रार्थी के काव्य में भाव तथा शिल्प—एक विवेचन” विषय पर गहन शोधपत्र प्रस्तुत किया। उनके विचारों में प्रार्थी जी के काव्य की गहराई और शिल्प की विशिष्टता स्पष्ट रूप से झलकती रही। वहीं डॉ. आशा शर्मा ने “लाल चंद प्रार्थी तथा पहाड़ी संस्कृति—एक दूसरे के पर्याय” विषय पर अपने शोधपत्र के माध्यम से यह बताया कि प्रार्थी जी का साहित्य हिमाचल की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

शोधपत्र वाचन के बाद आयोजित परिचर्चा सत्र में वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। कुल्लू के डॉ. सूरत राम ठाकुर ने प्रार्थी जी से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व की सरलता और महानता को उजागर किया। सिरमौर के साहित्यकार यज्ञदत्त ने युवाओं से प्रार्थी जी के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। वहीं डॉ. शंकर वशिष्ठ और डॉ. मदन हिमाचली ने प्रार्थी जी के जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. मदन हिमाचली ने अकादमी के रिक्त पदों पर चिंता भी व्यक्त की, जो चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिलीप वशिष्ठ द्वारा कुशलता से किया गया। विशिष्ट अतिथि डॉ. मस्तराम शर्मा ने शोधपत्र प्रस्तुतकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि काव्य में छंदों का प्रयोग साहित्य को विशेष महत्व प्रदान करता है। उन्होंने अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को सफल और प्रेरणादायक बताया।

मुख्य अतिथि पद्मश्री विद्यानन्द सराईक ने अपने संबोधन में लाल चंद प्रार्थी के काव्य को लोक संस्कृति और नाट्य परंपरा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने प्रार्थी जी के साहित्य को समाज के लिए अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनका काव्य आज भी प्रासंगिक है और आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय संबोधन देते हुए डॉ. ओम प्रकाश राही ने पूरे समारोह का सार प्रस्तुत किया और अकादमी के इस सफल आयोजन की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से अकादमी की सहायक सचिव डॉ. श्यामा वर्मा का धन्यवाद ज्ञापित किया।

अकादमी की सहायक सचिव डॉ. श्यामा वर्मा ने बताया कि यह आयोजन दो सत्रों में सम्पन्न हुआ। दूसरे सत्र में बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के अनेक प्रतिष्ठित कवियों ने भाग लिया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. शंकर वशिष्ठ ने की। कवि सम्मेलन में डॉ. सुनील डिमरी, शिव प्रकाश पथिक, शेरजंग चौहान, कमल कुमार पाराशर, स्नेहलता, रोशन जसवाल सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यह समारोह न केवल लाल चंद प्रार्थी के साहित्यिक योगदान को सम्मान देने का अवसर बना, बल्कि हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करने का माध्यम सिद्ध हुआ।