किन्नौर में एक दिवसीय बागवानी प्रशिक्षण शिविर
उपनिदेशक उद्यान किन्नौर के सभागार में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, मशोबरा तथा बागवानी विभाग जिला किन्नौर के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय बागवानी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में कल्पा खंड के लगभग 50 प्रगतिशील बागवानों ने भाग लिया। शिविर का उद्देश्य सेब उत्पादन, कीट प्रबंधन, मधुमक्खी पालन और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान कर बागवानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना था।
विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. संगीता शर्मा (कीट वैज्ञानिक), डॉ. बलबीर सिंह (विषय विशेषज्ञ उद्यान), डॉ. शमशेर सिंह (विषय विशेषज्ञ उद्यान) तथा डॉ. राजेश कुमार (उद्यान विकास अधिकारी) ने बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। इन विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से बेहतर उत्पादन की दिशा में मार्गदर्शन दिया।
सेब के कीट प्रबंधन पर विशेष सत्र
डॉ. संगीता शर्मा ने सेब के विभिन्न कीटों से होने वाले नुकसान और उनकी रोकथाम के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सेब में माइट (Mite) की रोकथाम के लिए हरीकली से आधा इंच हरीकली अवस्था के बीच हार्टीकल्चर मिनरल ऑयल (HMO) 4 लीटर / 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सिफारिश की। उन्होंने यह भी कहा कि मित्र कीटों की पहचान और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बागवानों को सलाह दी गई कि बिना वैज्ञानिकों अथवा विशेषज्ञों के परामर्श के कोई भी कीटनाशक का छिड़काव न करें।
मधुमक्खियों का महत्व और परागण
डॉ. बलबीर सिंह ने बागवानी में मधुमक्खियों के महत्व और परागण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बेहतर परागण से फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है। डॉ. शमशेर सिंह ने Mukhyamantri Madhu Vikas Yojana के अंतर्गत उपलब्ध सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत बागवानों को मधुमक्खी पालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
मधुवंश (बक्से) उपलब्ध कराने की जानकारी
डॉ. राजेश कुमार ने बागवानों को विभाग द्वारा परागण हेतु उपलब्ध कराए जाने वाले मधुवंश (बक्सों) की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इच्छुक बागवान विभाग में आवेदन देकर मधुवंश प्राप्त कर सकते हैं। मधुमक्खी बक्सों की उपलब्धता से सेब उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
आय बढ़ाने की दिशा में पहल
किन्नौर जिला सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, किंतु बदलते मौसम और कीट प्रकोप के कारण उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में वैज्ञानिक प्रशिक्षण और समयबद्ध छिड़काव से बागवानों को नुकसान से बचाया जा सकता है। 50 बागवानों की सहभागिता इस बात का संकेत है कि किसान नई तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। मधुमक्खी पालन और वैज्ञानिक कीट प्रबंधन अपनाने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आय में भी स्थायी वृद्धि होगी।
निष्कर्ष
किन्नौर में आयोजित इस एक दिवसीय बागवानी प्रशिक्षण शिविर ने बागवानों को आधुनिक तकनीकों, कीट प्रबंधन और मधुमक्खी पालन के महत्व से अवगत कराया। 4 लीटर / 200 लीटर पानी की वैज्ञानिक सिफारिश, 50 बागवानों की भागीदारी, और मधु विकास योजना की जानकारी—ये सभी पहलें कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जिले में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और टिकाऊ बागवानी को बढ़ावा मिलेगा।