शिमला में पर्यावरण संरक्षण पर कर्ण नंदा का जोर

rakesh nandan

04/04/2026

हिमाचल प्रदेश की राजधानी Shimla में आयोजित शिमला एनवायरमेंट हेरिटेज कंजर्वेशन एवं ब्यूटीफिकेशन (SEHB) सोसाइटी की आठवीं वार्षिक साधारण बैठक में पर्यावरण संरक्षण और शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस बैठक में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी Karan Nanda ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।

बैठक के दौरान शिमला की ऐतिहासिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तृत विमर्श किया गया। उपस्थित सदस्यों ने शहर की प्राकृतिक सुंदरता और पहचान को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कर्ण नंदा ने अपने संबोधन में कहा कि शिमला केवल एक शहर नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसे संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण और विरासत संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक शहर की पहचान को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा।

बैठक में उपस्थित सदस्यों के साथ विचार-विमर्श करते हुए कर्ण नंदा ने कहा कि शिमला को स्वच्छ, हरित और विरासत-संवेदनशील शहर बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। इसमें स्थानीय नागरिकों, विभिन्न संस्थाओं और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा। जब तक आम जनता इस दिशा में सक्रिय भागीदारी नहीं करेगी, तब तक स्थायी परिणाम प्राप्त करना कठिन होगा।

कर्ण नंदा ने SEHB सोसाइटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच शहर के सतत विकास और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि शहर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ उसकी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने और सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।

अंत में कर्ण नंदा ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों और सकारात्मक सोच के साथ शिमला को एक आदर्श, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर काम करें, तो यह लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकता है।