कांगड़ा भूकंप स्मृति में रैली, एडीएम ने किया जागरूक

rakesh nandan

04/04/2026

हिमाचल प्रदेश में 1905 Kangra earthquake की 121वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रमों के तहत एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एडीएम प्रोटोकॉल Jyoti Rana ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और लोगों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एडीएम ज्योति राणा ने कहा कि 121 वर्ष पूर्व कांगड़ा में आया विनाशकारी भूकंप एक बहुत बड़ी त्रासदी थी, जिसमें भारी जन-धन का नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय आपदा प्रबंधन के लिए न तो कोई व्यवस्थित तंत्र विकसित हुआ था और न ही आम लोगों में इसके प्रति जागरूकता थी।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। आज जिला स्तर से लेकर उपमंडल स्तर तक जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के माध्यम से एक सुदृढ़ और प्रभावी व्यवस्था स्थापित की गई है। इसके साथ ही आधुनिक संसाधनों और प्रशिक्षित टीमों की उपलब्धता के कारण किसी भी आपदा से निपटने की क्षमता पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

एडीएम ने कहा कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से तैयारी की जाए और समय-समय पर अभ्यास किए जाएं, तो आपात स्थिति में बचाव एवं राहत कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से सरकार द्वारा आपदा मित्र योजना शुरू की गई है, जिसके तहत स्थानीय युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये प्रशिक्षित वालंटियर्स आपदा के समय सबसे पहले मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ज्योति राणा ने बताया कि किसी भी आपदा के दौरान स्थानीय लोगों की भूमिका अत्यंत अहम होती है, क्योंकि वे घटनास्थल के सबसे नजदीक होते हैं और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम होते हैं। इसलिए उन्हें प्रशिक्षित और जागरूक बनाना आपदा प्रबंधन की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जागरूकता रैली के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि भूकंप या अन्य आपदाओं के समय घबराने के बजाय संयम बनाए रखना चाहिए और सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए। साथ ही लोगों को सुरक्षित स्थानों की पहचान, आपातकालीन संपर्क और प्राथमिक उपचार जैसी आवश्यक जानकारी रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाना था, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर और सजग बनाना भी था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे सही निर्णय लेकर नुकसान को कम कर सकें।

इस प्रकार के आयोजन यह दर्शाते हैं कि प्रशासन आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर है और समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, प्रशिक्षण और सामूहिक भागीदारी ही आपदाओं के प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।