हिमाचल प्रदेश के Hamirpur में शनिवार को 1905 Kangra earthquake की 121वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर उपायुक्त कार्यालय परिसर में जागरूकता कार्यक्रम, रैली और मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करना और आपातकालीन परिस्थितियों में विभागों की तैयारियों का आकलन करना रहा।
इस अवसर पर उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अध्यक्ष गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि 121 वर्ष पूर्व कांगड़ा घाटी में आया भूकंप एक भीषण त्रासदी थी, जिसमें भारी जन-धन का नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय न तो आपदा प्रबंधन की कोई सुदृढ़ व्यवस्था थी और न ही लोगों में इसके प्रति जागरूकता थी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में स्थिति काफी बदल चुकी है। अब जिला स्तर से लेकर उपमंडल स्तर तक डीडीएमए के माध्यम से एक मजबूत तंत्र विकसित किया गया है, जिसमें आधुनिक संसाधन और प्रशिक्षित टीमें उपलब्ध हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है, ताकि नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ाने के लिए आपदा मित्र योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत स्थानीय युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आपदा के समय तुरंत राहत एवं बचाव कार्यों में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान सबसे पहले स्थानीय लोग ही घटनास्थल पर पहुंचते हैं, इसलिए उनका प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान एसडीएम संजीत सिंह ने उपायुक्त, अधिकारियों और आईटीआई हमीरपुर सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कांगड़ा भूकंप के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह घटना हिमाचल प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी।
इसके पश्चात उपायुक्त कार्यालय से नगर निगम कार्यालय तक एक जागरूकता रैली निकाली गई। इस रैली में प्रतिभागियों ने लोगों को भूकंप के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक किया। रैली के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों की पहचान करने और आपात स्थिति में सही कदम उठाने का संदेश दिया गया।

रैली के बाद उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान होमगार्ड्स और अग्निशमन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। मॉक ड्रिल में दिखाया गया कि भूकंप के दौरान किस प्रकार फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जाता है और घायलों को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाया जाता है।
इस अवसर पर तहसीलदार एवं कार्यकारी जिला राजस्व अधिकारी नरेश पटियाल, नायब तहसीलदार जगदीश ठाकुर, आईटीआई के प्रधानाचार्य सुभाष शर्मा सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस कार्यक्रम के माध्यम से आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाने के महत्व को रेखांकित किया।
यह आयोजन न केवल विभागों की तैयारियों का परीक्षण करने में सफल रहा, बल्कि आम लोगों को भी आपदा के प्रति सजग और सतर्क रहने का संदेश देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के नियमित अभ्यास भविष्य में संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
