जिला बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत आज तीन दिवसीय कहलूर लोकोत्सव का भव्य शुभारम्भ हुआ। इस सांस्कृतिक आयोजन का उद्घाटन उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर के सहायक आयुक्त राज कुमार ने किया। लोकोत्सव के पहले ही दिन जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की रंगीन झलक देखने को मिली।
कहलूर लोकोत्सव का उद्देश्य स्थानीय लोक संस्कृति, परंपराओं और कला को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस आयोजन में लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक गाथाएं और पारंपरिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में जिले और आसपास के क्षेत्रों के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
उद्घाटन अवसर पर सहायक आयुक्त राज कुमार ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन हमारी धरोहर को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते समय में लोक संस्कृति को संरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन ऐसे आयोजनों के माध्यम से इसे नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कहलूर लोकोत्सव न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम है, बल्कि यह स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी प्रदान करता है। इससे कलाकारों को पहचान मिलती है और वे अपनी कला को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं।
लोकोत्सव के प्रथम दिन विभिन्न महिला मंडलों और स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना से हुई, जिसने पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वर प्रदान किया।
इसके बाद मंच पर गिद्दा, लोक गीत, संस्कार गीत, लोक नृत्य और गुगा गाथा जैसी प्रस्तुतियां पेश की गईं। कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ अपनी प्रस्तुति देकर हिमाचली संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
विशेष रूप से गिद्दा और लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह का माहौल बना दिया। वहीं संस्कार गीतों और लोक गाथाओं ने क्षेत्र की परंपराओं और सामाजिक जीवन की झलक प्रस्तुत की। गुगा गाथा जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियों ने लोक आस्था और विश्वास को मंच पर जीवंत कर दिया।
कहलूर लोकोत्सव आयोजन समिति की संयोजक एवं जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन में करीब 47 महिला मंडल, स्वयं सहायता समूह, व्यक्तिगत कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाएं भाग ले रही हैं। यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि जिले में लोक संस्कृति के प्रति लोगों का गहरा जुड़ाव है।
उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें और भी अधिक आकर्षक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। इस लोकोत्सव के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी कला को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है।
नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित यह लोकोत्सव न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक साबित हो रहा है। इस प्रकार के आयोजन से जिले की पहचान को नई ऊंचाई मिलती है और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिलता है।
कुल मिलाकर, कहलूर लोकोत्सव बिलासपुर की सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सुंदर संतुलन प्रस्तुत करता है। आने वाले दिनों में यह उत्सव और भी रंगीन और आकर्षक रूप में सामने आएगा।