कहलूर लोकोत्सव में सांस्कृतिक रंगों की धूम

rakesh nandan

19/03/2026

राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित कहलूर लोकोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक रंगों की अद्भुत छटा देखने को मिली। इस अवसर पर कुल 53 महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, व्यक्तिगत कलाकारों और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

लोक संस्कृति की जीवंत झलक

कार्यक्रम के दूसरे दिन महिला मंडलों और स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने गिद्दा, लोक-गीत, संस्कार गीत, लोक-नृत्य, धाजा और एकल गीत जैसी विविध प्रस्तुतियां मंचित कीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हिमाचली लोक संस्कृति की समृद्ध परंपराओं और लोक जीवन की झलक देखने को मिली। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।

दर्शकों ने किया उत्साहवर्धन

कार्यक्रम के दौरान दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज से पूरा परिसर गूंज उठा और कलाकारों का उत्साह और भी बढ़ गया। विशेष रूप से महिला मंडलों की प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें पारंपरिक परिधान, लोक संगीत और सामूहिक नृत्य ने सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

कहलूर लोकोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यह आयोजन न केवल स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य भी करता है।

महिला मंडलों की अहम भूमिका

इस लोकोत्सव में महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इन समूहों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया।

आयोजन समिति की उपस्थिति

इस अवसर पर कहलूर लोकोत्सव आयोजन समिति की संयोजक एवं जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल भी उपस्थित रहीं। उन्होंने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा मंच

नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित यह लोकोत्सव स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। इससे न केवल कलाकारों को पहचान मिलती है, बल्कि उनकी कला को आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी मिलती है।

निष्कर्ष

कहलूर लोकोत्सव का दूसरा दिन सांस्कृतिक रंगों, लोक परंपराओं और उत्साह से भरपूर रहा। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति आज भी जीवंत है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से इसे नई पीढ़ी तक सफलतापूर्वक पहुंचाया जा रहा है।