जनक राज ने स्वास्थ्य बजट पर उठाए गंभीर सवाल

rakesh nandan

28/03/2026

भाजपा नेता एवं विधायक Janak Raj ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की मांग संख्या 9 पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार की नीतियों और बजट घोषणाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट पेश करना केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि संविधान के तहत सरकार की जिम्मेदारी है कि वह बजट में किए गए वादों को धरातल पर लागू करे।

डॉ. जनक राज ने आरोप लगाया कि पिछले बजटों में की गई कई महत्वपूर्ण घोषणाएं आज भी कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने विशेष रूप से Scrub Typhus के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर वर्ष 10 से 15 लोगों की मौत होने के बावजूद राज्य स्तर की रिसर्च यूनिट अभी तक स्थापित नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि Dr. Rajendra Prasad Medical College और Kamla Nehru Hospital में लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर खोलने की घोषणा भी अधूरी पड़ी है। इससे नवजात शिशुओं की माताओं को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

विधायक ने सरकार से सवाल किया कि प्रत्येक जिले में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब, गेस्ट वर्कर स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट, डायलिसिस सुविधाएं, ब्लड स्टोरेज यूनिट और न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट स्थापित करने की घोषणाओं का क्या हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि Indira Gandhi Medical College में तीन महीने के भीतर PET स्कैन सुविधा शुरू करने का वादा एक साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है।

एंबुलेंस सेवाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि 25 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदने की घोषणा का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद सरकार महंगी तकनीकों पर ध्यान दे रही है।

Himcare Scheme का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि लाखों लोगों को इससे लाभ मिला है। उन्होंने मांग की कि इससे जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जानी चाहिए।

डॉ. जनक राज ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में लागू प्रोक्योरमेंट पॉलिसी को दरकिनार कर सिविल सप्लाई के माध्यम से खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रक्रियाएं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।

जनजातीय क्षेत्रों की समस्याओं को उठाते हुए उन्होंने कहा कि पांगी, भरमौर और होली जैसे दूरदराज क्षेत्रों में आज भी अल्ट्रासाउंड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इससे विशेष रूप से महिलाओं को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों में तकनीशियन, नर्स और विशेषज्ञ डॉक्टरों के कई पद खाली पड़े हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उदाहरण के तौर पर पालमपुर अस्पताल में सर्जन होने के बावजूद एनेस्थेटिस्ट की कमी के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।

डॉ. जनक राज ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां एक ओर बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहीं दूसरी ओर रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने इसे “प्राथमिकताओं का असंतुलन” बताया।

अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर सुधार किए जाएं। उन्होंने कहा कि बजट में किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से लागू करना बेहद जरूरी है, ताकि प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।