जल तरंग जोश महोत्सव-2025 के तहत स्थापित विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों से सजे इन स्टॉलों ने न केवल आगंतुकों का स्वाद जीता, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को भी मजबूत बनाया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, चांदपुर की आठ महिलाओं ने सरसों का साग-मक्की की रोटी और फ्रूट चाट का स्टॉल लगाया, जिसकी खूब सराहना हो रही है। समूह की प्रधान तृप्ता देवी ने बताया कि आजीविका मिशन ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता का एक मजबूत मंच दिया है।
दिव्यांग किरण स्वयं सहायता समूह, नोआ की चार महिलाओं ने कचोरी और कुल्लू सिड्डू का स्टॉल लगाया है। समूह की प्रधान सुषमा कुमारी ने कहा कि ऐसे आयोजन दिव्यांग महिलाओं के आत्मविश्वास और आजीविका दोनों को बढ़ावा देते हैं।
महोत्सव में शिवम स्वयं सहायता समूह, गंवाओ की महिलाओं द्वारा परोसे जा रहे सरसों का साग-मक्की की रोटी और बेजुओं की कढ़ी भी लोगों को खूब पसंद आ रही है।
इसके साथ ही राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत वेद एवं प्रतीक्षा स्वयं सहायता समूह, सदर द्वारा लगाए गए सिड्डू, कचोरी और मोमो के स्टॉल पर भी आगंतुकों की विशेष भीड़ है।
महोत्सव में राजस्थानी व्यंजन भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। दाल-बाटी-चूरमा, मूंग दाल कचौरी, बड़ा पाव, पाव भाजी, डोसा और कुल्हड़ पिज्जा जैसे व्यंजनों ने लोगों का मन मोह लिया।