आईटीबीपी अब किसानों से सीधे खरीदेगी उत्पाद

rakesh nandan

31/03/2026

हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत और अवसर लेकर एक नई पहल सामने आई है। Indo-Tibetan Border Police (आईटीबीपी) जल्द ही हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित करने जा रही है, जिसके तहत स्थानीय किसानों से सीधे कृषि उत्पादों की खरीद की जाएगी।

इस पहल के तहत आईटीबीपी ताज़ी सब्जियां, फल, दूध, पनीर, मांस, ट्राउट मछली और अन्य कृषि उत्पाद सीधे किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उत्पादकों से खरीदेगी। इससे किसानों को अपने ही गांव में बाजार उपलब्ध होगा और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और बागवानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने सोमवार देर शाम आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों—उत्तरी फ्रंटियर कमांडर Manu Maharaj और सेक्टर कमांडर Pawan Kumar Negi—के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में इस योजना के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

सरकार का मानना है कि इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा। यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद होगा, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में रहते हैं और जिन्हें बाजार तक पहुंचने में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था न केवल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आईटीबीपी को उच्च गुणवत्ता वाले ताज़ा उत्पादों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे सुरक्षा बलों को बेहतर और ताजा खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी, जबकि किसानों को स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिलेगा।

आईटीबीपी के आईजी मनु महाराज ने बताया कि इस प्रकार की पहल पहले Uttarakhand में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है और वहां किसानों को इसका व्यापक लाभ मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में भी यह मॉडल सफल रहेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगा।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) के विद्युतीकरण को लेकर Revamped Distribution Sector Scheme के तहत संभावनाओं पर विचार किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा देती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती हैं। यह कदम ‘लोकल से वोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, आईटीबीपी और हिमाचल सरकार के बीच होने वाला यह समझौता सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि क्षेत्र में समावेशी और सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।