गोविंद सागर झील में अवैध मछली शिकार और प्रतिबंधित जालों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए मत्स्य विभाग बिलासपुर ने 3 से 5 दिसंबर 2025 तक विशेष सघन अभियान चलाया। जलजीव संरक्षण और मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने झील के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण कर कई अनियमितताओं का पता लगाया। सहायक निदेशक मत्स्य विभाग पीयूष ठाकुर ने बताया कि 3 दिसंबर को लाहड़ी फाट, नग्यर, चपलू और बकनाला क्षेत्रों में संयुक्त निरीक्षण के दौरान कुल 06 प्रकरण दर्ज किए गए। इसमें 20 किलोग्राम बिना लाइसेंस पकड़ी गई मछली जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 2000 रुपये आंकी गई। वहीं मौके पर 3500 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया।
4 दिसंबर को नकहड़ी, लैलाकुठी, डेहरी और डोगा क्षेत्रों में अभियान आगे बढ़ाया गया, जिसमें अंडर-साइज और प्रतिबंधित जालों के उपयोग के 4 मामले दर्ज हुए। लैलाकुठी में एक व्यक्ति पर 1000 रुपये जुर्माना लगाया गया और लगभग 15 किलोग्राम जाल जब्त किया गया। टीम ने मत्स्य संरक्षण संरचनाओं का निरीक्षण भी किया। इसी क्रम में 5 दिसंबर को बिलासपुर मंडल की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने सिलघींक क्षेत्र में एक अवैध परिवहन मामले में 16 किलोग्राम मछली बरामद की और आरोपी पर 2000 रुपये का चालान किया। जब्त मछली को 1600 रुपये मूल्य सहित सरकारी खजाने में जमा करवाया गया।
पीयूष ठाकुर ने कहा कि यह कार्रवाई मत्स्य अधिकारी अजय कुमार और उनकी टीम द्वारा सुदृढ़ समन्वय के साथ की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोविंद सागर झील क्षेत्र में अवैध मत्स्य गतिविधियों के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता नीति’ लागू है। भविष्य में भी कड़ी और नियमित निगरानी जारी रहेगी ताकि अवैध मछली व्यापार, जाल परिवहन और प्रतिबंधित नेट्स के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। उन्होंने स्थानीय मछुआरा समुदाय और क्षेत्रवासियों से हिमाचल प्रदेश मत्स्य नियमों का पालन करने और जलजीव संरक्षण में सहयोग देने की अपील की।