जिला ऊना में स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग द्वारा सर्वाइकल कैंसर, जिसे आम भाषा में गर्भाशय के मुंह का कैंसर कहा जाता है, से बचाव के लिए एक विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य बालिकाओं को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित करना और भविष्य में कैंसर के खतरे को कम करना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऊना संजीव कुमार वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान के तहत 29 मार्च, 5 अप्रैल और 12 अप्रैल (रविवार) को जिला के 27 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एचपीवी टीकाकरण किया जाएगा। यह टीका विशेष रूप से 14 से 15 वर्ष आयु की बालिकाओं को लगाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह टीकाकरण भारत सरकार के निर्देशों के तहत किया जा रहा है और इसका उद्देश्य कम उम्र में ही बालिकाओं को इस वायरस से सुरक्षा प्रदान करना है। एचपीवी वायरस सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण माना जाता है, और समय पर टीकाकरण से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस टीके की केवल एक खुराक ही लंबे समय तक प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) प्रदान करने में सक्षम है। यह टीका न केवल प्रभावशाली है, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी है। कई वैज्ञानिक शोधों में यह सिद्ध हो चुका है कि एचपीवी वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले वायरस से सुरक्षा प्रदान करती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस टीकाकरण को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि यह टीका किसी भी प्रकार के गंभीर दुष्प्रभाव का कारण नहीं बनता है और इससे बांझपन जैसी कोई समस्या नहीं होती है।
उन्होंने बताया कि इसके विपरीत, यदि एचपीवी वायरस का संक्रमण होता है, तो यह महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है और गर्भधारण में भी बाधा उत्पन्न कर सकता है। ऐसे में यह टीका प्रजनन अंगों को सुरक्षित रखने और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अधिक से अधिक बालिकाएं इस टीके का लाभ उठाएं और आने वाले समय में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में कमी लाई जा सके। इसके लिए विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, ताकि लोगों को इस टीके के महत्व के बारे में सही जानकारी मिल सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों को निर्धारित तिथियों पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में ले जाकर टीकाकरण करवाएं। उन्होंने कहा कि यह एक सुरक्षित और प्रभावी कदम है, जो बालिकाओं के स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जिला ऊना में इस प्रकार का अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है। यदि इस अभियान में व्यापक स्तर पर भागीदारी होती है, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
अंत में, स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलावासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें, भ्रांतियों से दूर रहें और समाज में जागरूकता फैलाने में भी अपनी भूमिका निभाएं।