Students Federation of India (एसएफआई) ने Himachal Pradesh University में छात्रों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार विरोध दर्ज किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के खिलाफ कई गंभीर मुद्दे उठाते हुए जल्द समाधान की मांग की है।
एसएफआई कैंपस सचिवालय सदस्य अखिल ने कहा कि विश्वविद्यालय को स्थापित हुए 56 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी छात्र मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 14 हॉस्टल हैं, जिनमें 4 लड़कों और 9 छात्राओं के हॉस्टल शामिल हैं, लेकिन इनकी स्थिति बेहद खराब है। कई हॉस्टलों में स्वच्छ पेयजल की कमी है, जिससे छात्रों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि लंबे समय से मरम्मत कार्य न होने के कारण शौचालय, कमरों की संरचना, पाइपलाइन और पेंटिंग की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। श्रीखंड बॉयज हॉस्टल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इसका सर्वे हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नवीनीकरण का कार्य पूरा नहीं हुआ है। इससे कई छात्र हॉस्टल सुविधा से वंचित हैं। एसएफआई ने मांग की कि श्रीखंड बॉयज हॉस्टल का नवीनीकरण जल्द से जल्द किया जाए।
एसएफआई के विश्वविद्यालय इकाई उपाध्यक्ष कॉमरेड अमन ने शिक्षा नीति के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि National Education Policy 2020 को बिना पर्याप्त चर्चा के लागू किया गया है, जिसका एसएफआई विरोध करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति के माध्यम से शिक्षा का निजीकरण, व्यापारीकरण और भगवाकरण किया जा रहा है।

परिवहन सुविधा को लेकर भी संगठन ने गंभीर चिंता जताई। अमन ने बताया कि पहले विश्वविद्यालय में 8 बसें संचालित होती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर केवल 3 रह गई है। पिछले वर्ष कार्यकारी परिषद (EC) में 2 नई बसें खरीदने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके कारण छात्रों को मजबूरी में निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि वर्ष 2019 में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, जिसके लिए दो बार आवेदन शुल्क के रूप में लगभग 4.5 करोड़ रुपये एकत्र किए गए, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। एसएफआई ने इसे छात्रों के साथ अन्याय बताया और जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।
इसके अलावा कोरोना काल (2019-20) के दौरान हुई प्रोफेसर भर्ती को लेकर भी संगठन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एसएफआई का कहना है कि इन भर्तियों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। एक मामला विश्वविद्यालय के गणित विभाग से जुड़ा हुआ है, जो Himachal Pradesh High Court तक पहुंचा। न्यायालय के आदेश के बाद दो प्रोफेसरों की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।
एसएफआई का आरोप है कि अन्य विभागों में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं हुई हैं और योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति की गई। संगठन ने इन सभी भर्तियों की न्यायिक जांच की मांग की है और विश्वविद्यालय के कुलपति से इस मामले में जांच समिति गठित करने की अपील की है।
संगठन ने विश्वविद्यालय के बजट में कटौती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस बार विश्वविद्यालय को केवल 142 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जो इसकी आवश्यकताओं के मुकाबले काफी कम है। इसके कारण शोध कार्यों में गिरावट आई है और भविष्य में इसका असर छात्रों पर भी पड़ सकता है।

एसएफआई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन छात्रों को एकजुट कर बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों के जनवादी अधिकारों की बहाली और समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
यह पूरा मामला दर्शाता है कि विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं, पारदर्शिता और संसाधनों को लेकर कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं, जिनका समाधान प्रशासन के लिए जरूरी हो गया है।