HPU में ABVP ने उठाए छात्र समस्याओं के मुद्दे

rakesh nandan

28/03/2026

Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (एबीवीपी) ने Himachal Pradesh University में छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक में जोरदार तरीके से अपनी मांगें रखीं। परिषद ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित समस्याओं, शैक्षणिक अव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की।

एबीवीपी प्रतिनिधियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रदेश का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है, लेकिन यहां कई महत्वपूर्ण समस्याएं लंबे समय से अनदेखी की जा रही हैं। परिषद ने सबसे अहम मांग के रूप में स्पेशल चांस के तहत लागू लेट कॉलेज कैपेसिटी (LCC) नियम में संशोधन की बात रखी। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को केवल फेल विषयों में ही परीक्षा देने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक दबाव और जटिलता कम हो सके।

परिषद ने 27 फरवरी को विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसक घटना का भी मुद्दा उठाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि दोषी छात्रों को निष्कासित किया जाना चाहिए, ताकि परिसर में शैक्षणिक वातावरण और शांति बनी रहे।

विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की कमी को भी एक गंभीर समस्या बताया गया। एबीवीपी ने कहा कि लंबे समय से कई पद खाली पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं और छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। परिषद ने मांग की कि इन पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी परिषद ने चिंता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र में 24×7 सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कम से कम दो स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की। साथ ही पर्याप्त स्टाफ और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही गई।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एबीवीपी ने विश्वविद्यालय परिसर के संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों, विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

शिक्षा के क्षेत्र में परिषद ने National Education Policy 2020 को विश्वविद्यालय में पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों को समयानुकूल और रोजगारोन्मुखी बनाने, शोध कार्यों को बढ़ावा देने तथा प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया।

छात्रावासों की खराब स्थिति पर भी एबीवीपी ने चिंता व्यक्त की। परिषद ने कहा कि कई हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने नए छात्रावासों के निर्माण, पुराने छात्रावासों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सफाई और मेस व्यवस्था में सुधार की मांग रखी। छात्राओं की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाने की भी आवश्यकता बताई गई।

परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर भी परिषद ने कई सुझाव दिए। उन्होंने समय पर परीक्षाएं आयोजित करने, परिणाम शीघ्र घोषित करने और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की। साथ ही छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डालने की बात भी कही गई।

इसके अलावा परिषद ने खेल, सांस्कृतिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देने, खेल मैदानों और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा छात्र कल्याण के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की मांग की। करियर काउंसलिंग और प्लेसमेंट सेल को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय हजारों छात्रों की उम्मीदों का केंद्र है, लेकिन वर्तमान में कई समस्याएं इसकी गरिमा को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि छात्र हित में जल्द सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

एबीवीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। परिषद ने अंत में आशा जताई कि कार्यकारी परिषद छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाएगी।