एचपीटीडीसी होटल निजीकरण पर भाजपा का सरकार पर हमला

rakesh nandan

04/04/2026

हिमाचल प्रदेश में Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने एचपीटीडीसी होटलों के निजीकरण के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के वरिष्ठ नेता Rajeev Sehjal और प्रदेश प्रवक्ता Sandeepani Bhardwaj ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे “कन्फ्यूजन की सरकार” करार दिया है।

डॉ. राजीव सहजल ने कहा कि सरकार के भीतर इस मुद्दे को लेकर स्पष्टता का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आरएस बाली यह कह रहे हैं कि उन्हें होटलों के निजीकरण की जानकारी नहीं है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया जा रहा है कि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे सरकार की दोहरी नीति और असंगत निर्णय प्रक्रिया का उदाहरण बताया।

भाजपा नेताओं का कहना है कि एचपीटीडीसी (हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम) के होटल प्रदेश के पर्यटन ढांचे की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में घाटे का हवाला देकर इन संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना प्रदेश के हितों के खिलाफ है। डॉ. सहजल ने तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार “घर भी बेचो, गहने भी बेचो” जैसी मानसिकता से काम कर रही है।

प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले संस्थानों को कमजोर किया जाता है और बाद में उन्हें घाटे में दिखाकर निजीकरण का रास्ता तैयार किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, जिसके तहत प्रदेश की संपत्तियों को चुनिंदा लोगों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर ही नेताओं के अलग-अलग बयान इस बात का प्रमाण हैं कि समन्वय की कमी है। उनके अनुसार, यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार में नीति और निर्णय को लेकर एकरूपता नहीं है, जिससे आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।

भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जहां एक ओर होटलों के निर्माण और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं होटलों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने इसे सरकार की नीयत पर सवाल उठाने वाला मुद्दा बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के संसाधनों और सार्वजनिक संपत्तियों को संरक्षित करने के बजाय उन्हें बेचने की दिशा में कार्य कर रही है। भाजपा नेताओं ने इसे “विकास नहीं, बल्कि विनाश का मॉडल” बताया।

इस पूरे मुद्दे को लेकर भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह इसे जनता के बीच उठाएगी। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार ने एचपीटीडीसी होटलों के निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया, तो प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि वे इस मुद्दे पर सरकार को घेरते रहेंगे और जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

यह मामला अब प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जहां एक ओर सरकार की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे जनहित से जोड़कर बड़े आंदोलन की तैयारी में है।