हिमाचल में डिजिटल शिक्षा पर लोकसभा में उठे सवाल

rakesh nandan

25/03/2026

हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति को लेकर लोकसभा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है। भाजपा के लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने इस विषय पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया के तहत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन राज्य स्तर पर इन योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के माध्यम से उन्होंने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं की स्थिति से जुड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कुल 14,397 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें 13,978 ग्रामीण और 469 शहरी स्कूल शामिल हैं।

इनमें से केवल 8,910 स्कूलों (8,599 ग्रामीण और 311 शहरी) में ही इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। इसका मतलब है कि हजारों स्कूल अभी भी इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं, जो डिजिटल शिक्षा के लिए एक बुनियादी आवश्यकता है।

वहीं, डिजिटल उपकरणों की बात करें तो कुल 14,251 स्कूलों (13,783 ग्रामीण और 468 शहरी) में डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, स्मार्ट क्लास की सुविधा केवल 10,995 स्कूलों (10,570 ग्रामीण और 425 शहरी) तक ही सीमित है। इससे स्पष्ट होता है कि उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद उनका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है।

सुरेश कश्यप ने कहा कि ये आंकड़े प्रदेश में डिजिटल शिक्षा की वास्तविक स्थिति को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि जब डिजिटल उपकरण उपलब्ध हैं, तो सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा क्यों नहीं है? यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब प्रदेश सरकार को देना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्षों में भारी बजट उपलब्ध कराया है। आंकड़ों के अनुसार:

  • 2021-22: ₹10,165.60 करोड़ (राज्य) और ₹9,149.04 करोड़ (केंद्र)
  • 2022-23: ₹16,351.33 करोड़ (राज्य) और ₹14,716.20 करोड़ (केंद्र)
  • 2023-24: ₹14,656.54 करोड़ (राज्य) और ₹13,108.99 करोड़ (केंद्र)
  • 2024-25: ₹3,722.54 करोड़ (राज्य) और ₹3,350.28 करोड़ (केंद्र)
  • 2025-26 (BE): ₹7,920.86 करोड़ (राज्य) और ₹7,128.77 करोड़ (केंद्र)

उन्होंने कहा कि इतने बड़े बजट के बावजूद यदि स्कूलों में इंटरनेट और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही हैं, तो यह राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

सुरेश कश्यप ने राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत देशभर में 3,71,749 स्कूलों को इंटरनेट कनेक्टिविटी दी गई है और लगभग 89.92 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश में इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने प्रदेश सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे:

  • जब डिजिटल उपकरण उपलब्ध हैं, तो सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लास क्यों नहीं?
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी हजारों स्कूलों तक क्यों नहीं पहुंची?
  • केंद्र से मिले बजट का पूरा उपयोग क्यों नहीं किया गया?

सुरेश कश्यप ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में यदि हिमाचल के बच्चों को इससे वंचित रखा जाता है, तो यह उनके भविष्य के साथ अन्याय होगा।

उन्होंने मांग की कि इस पूरे विषय की गंभीरता से समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर स्कूल तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचें। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करते हुए इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कुल मिलाकर, यह मुद्दा अब प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन सकता है। आने वाले समय में इस पर सरकार की प्रतिक्रिया और कदमों पर सभी की नजरें रहेंगी।