हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पांच दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। Shimla में सैकड़ों कर्मचारी एकत्रित होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह हड़ताल 5 अप्रैल से 11 अप्रैल तक जारी रहेगी। CITU से संबंधित हिमाचल प्रदेश 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के बैनर तले कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शिमला स्थित छोटा शिमला सचिवालय के बाहर महापड़ाव पर बैठे हैं। हड़ताल के पहले ही दिन प्रदेशभर में एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं, जिससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
⚠️ सेवाएं प्रभावित, कर्मचारियों का प्रदर्शन
यूनियन के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों से सैकड़ों कर्मचारी शिमला पहुंचे हैं और पांच दिन तक लगातार धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र नहीं माना गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
🗣️ नेताओं के गंभीर आरोप
धरने को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने कहा कि नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन कार्यरत कर्मचारी लंबे समय से शोषण का शिकार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है और उनसे 12-12 घंटे काम करवाया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता।
⚖️ न्यायालय के आदेशों की अनदेखी
यूनियन नेताओं ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और अन्य न्यायिक संस्थाओं के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों से श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है और कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
🚫 प्रताड़ना और अनियमितताएं
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब वे यूनियन के माध्यम से अपनी आवाज उठाते हैं, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यूनियन नेताओं का कहना है कि कई कर्मचारियों का तबादला कर दिया जाता है या उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ मामलों में कर्मचारियों को बिना कारण कई महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है। इसके अलावा ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर त्रुटियों के आरोप लगाए गए हैं। यूनियन का दावा है कि कर्मचारियों से अनुचित कटौतियां की जा रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
💰 वेतन और सुविधाओं को लेकर मांगें
यूनियन ने सरकार से मांग की है कि:
- कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए
- 12 घंटे कार्य पर डबल ओवरटाइम दिया जाए
- सभी वैधानिक छुट्टियां प्रदान की जाएं
- ईपीएफ और ईएसआई में त्रुटियां सुधारी जाएं
- पूर्व सेवा अवधि के लाभ और बकाया एरियर का भुगतान किया जाए
इसके अलावा उन्होंने जीवीके ईएमआरआई के समय के लंबित भत्तों, ग्रेच्युटी और नोटिस पे के भुगतान की भी मांग उठाई है।
📢 संवैधानिक अधिकारों की बात
यूनियन नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के प्रावधानों को लागू करने की भी मांग की।
🔚 निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर डाला है। अब यह देखना होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती हैं और इस गतिरोध का समाधान कब तक निकलता है।