पेंशनरों ने 30 मार्च को विधानसभा घेराव का ऐलान

rakesh nandan

20/03/2026

हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों की समस्याओं को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विद्युत बोर्ड पेंशनर फॉर्म धौलाकुआं इकाई ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो 30 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

सरकार पर गंभीरता की कमी का आरोप

पेंशनरों का आरोप है कि प्रदेश सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि सरकार को सत्ता में आए तीन वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों का समाधान नहीं किया गया है।

लंबित डीए, एरियर और मेडिकल भत्ते

विद्युत बोर्ड पेंशनर फॉर्म धौलाकुआं इकाई के अध्यक्ष भगवान दास चौधरी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पेंशनरों को मिलने वाले कई महत्वपूर्ण लाभ लंबे समय से लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि:

  • महंगाई भत्ता (DA) का भुगतान नहीं हुआ

  • एरियर (बकाया राशि) अटका हुआ है

  • मेडिकल भत्ते का भी समय पर भुगतान नहीं हो रहा

इन सब कारणों से पेंशनरों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

समय पर पेंशन न मिलने की शिकायत

उन्होंने यह भी बताया कि कई पेंशनरों को समय पर पेंशन तक नहीं मिल रही है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। जीवन के अंतिम पड़ाव में इस तरह की आर्थिक अस्थिरता पेंशनरों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

पेंशनरों को किया जा रहा एकजुट

धौलाकुआं इकाई इन दिनों प्रदेश भर के पेंशनरों को एकजुट करने का काम कर रही है। संगठन का उद्देश्य है कि सभी पेंशनर एक मंच पर आकर अपनी आवाज को मजबूत करें, ताकि सरकार तक उनकी मांगें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।

30 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी

पेंशनर फॉर्म ने साफ तौर पर कहा है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे 30 मार्च को विधानसभा का घेराव करेंगे। यह आंदोलन राज्य स्तर पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में पेंशनर भाग लेने की संभावना है।

सरकार से की गई प्रमुख मांगें

पेंशनरों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • लंबित डीए और एरियर का तुरंत भुगतान

  • मेडिकल भत्ते का समय पर वितरण

  • नियमित और समयबद्ध पेंशन भुगतान

सामाजिक और मानवीय पहलू

विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशनर समाज का वह वर्ग है, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सेवा में बिताया है। ऐसे में उनके साथ आर्थिक अनिश्चितता और देरी होना एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है।

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों का बढ़ता असंतोष सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। पेंशनरों की यह चेतावनी आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर डाल सकती है।