हिमाचल किसान सभा ने देशव्यापी आह्वान पर किया धरना-प्रदर्शन

अखिल भारतीय किसान सभा के देशव्यापी आह्वान पर हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ और CITU के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों, खंडों और तहसीलों में धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन प्रदर्शनों में किसानों-बागवानों के प्रमुख मुद्दों को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों और अथॉरिटीज़ के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे गए।

शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

शिमला में किसान-बागवान नेताओं ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त अनुपम कश्यप को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसान सभा के कसुम्पटी इकाई सचिव जयशिव ठाकुर, राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर, सेब उत्पादक संघ के सदस्य सन्नी सेकटा और प्रदेशाध्यक्ष सोहन ठाकुर ने किसानों के मुद्दों पर विस्तार से बात की।

प्रमुख मुद्दे और मांगें

नेताओं ने खेती-किसानी, भूमि अधिकार, 1980 के वन अधिनियम संशोधन, सेब उत्पादन और विपणन से जुड़े मामलों को प्रमुखता से रखा। राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित 11 मांगें शामिल थीं—

  1. CETA और अमेरिका के साथ FTA का विरोध – GM खाद्य पदार्थों के आयात और 25% अमेरिकी टैरिफ का विरोध।

  2. NPFAM और नई राष्ट्रीय सहकारी नीति का विरोध – APMC मंडियों के निजीकरण और FPOs को कॉर्पोरेट नियंत्रण से मुक्त रखने की मांग।

  3. C2+50% फार्मूले पर MSP की गारंटी – सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद सुनिश्चित हो।

  4. समग्र कर्ज माफी – माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के उत्पीड़न पर रोक और ब्याज दर नियंत्रित करने की मांग।

  5. बिजली निजीकरण का विरोध, स्मार्ट मीटर बंद – ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और लंबित बिल माफी।

  6. लैंड पूलिंग नीति का विरोध – 2013 के LARR अधिनियम का सख्त पालन।

  7. ₹10,000 पेंशन – सभी प्रकार की सरकारी पेंशन को मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग।

  8. पुराने ट्रैक्टरों पर प्रतिबंध का विरोध – 10 साल पुराने वाहनों को प्रतिबंधित करने की योजना रद्द की जाए।

  9. वन अधिकार अधिनियम 2006 का सही क्रियान्वयन – आदिवासियों के विस्थापन और जंगल कटाई पर रोक।

  10. उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्कूल बंद करने की नीति का विरोध

  11. साम्प्रदायिक हिंसा पर रोक – झूठे मुकदमे वापसी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा।

किसान नेताओं की चेतावनी

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसान, बागवान, मजदूर और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है।