संसद में उर्वरक मुद्दा, लॉटरी पर भाजपा का विरोध

rakesh nandan

27/03/2026

हिमाचल प्रदेश से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों—उर्वरक आपूर्ति और लॉटरी प्रणाली—को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने संसद में पर्वतीय राज्यों के किसानों से जुड़े उर्वरक आपूर्ति के मुद्दे को उठाया, वहीं विधायक राकेश जमवाल ने प्रदेश में लॉटरी प्रणाली शुरू करने की संभावित योजना का कड़ा विरोध किया।

लोकसभा में प्रश्न संख्या 484 के तहत सुरेश कश्यप ने केंद्र सरकार से पूछा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों में उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन क्षेत्रों में उर्वरकों की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती है।

इस पर केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जवाब देते हुए बताया कि केंद्र सरकार बाजार विकास सहायता (MDA) योजना के माध्यम से जैविक और प्राकृतिक उर्वरकों को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने बताया कि फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM), लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM) जैसे जैविक उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। इस योजना के तहत किसानों को ₹1500 प्रति मीट्रिक टन की सब्सिडी दी जा रही है।

इसके अलावा, गोबर-धन योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि देशभर में लगभग 133 संयंत्र पंजीकृत हो चुके हैं, हालांकि हिमाचल प्रदेश में अभी तक कोई संयंत्र स्थापित नहीं हुआ है।

सुरेश कश्यप ने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।

दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश में लॉटरी प्रणाली को पुनः शुरू करने की संभावित योजना को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध जताया है। विधायक राकेश जमवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राजस्व बढ़ाने के नाम पर युवाओं को गलत दिशा में धकेलने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि लॉटरी प्रणाली समाज के लिए हानिकारक है और इससे युवाओं में जुए की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस फैसले के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का गंभीर मूल्यांकन करना चाहिए।

राकेश जमवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान शांति और सामाजिक संतुलन से है, ऐसे में लॉटरी जैसी व्यवस्था को लागू करना प्रदेश की संस्कृति के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार देने में असफल रही है और अब लॉटरी के माध्यम से राजस्व जुटाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस योजना को लागू करती है, तो भाजपा इसका सड़कों से लेकर विधानसभा तक विरोध करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर केंद्र सरकार कृषि सुधार और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य स्तर पर राजस्व और सामाजिक नीतियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

कुल मिलाकर, उर्वरक आपूर्ति और लॉटरी प्रणाली जैसे मुद्दे हिमाचल प्रदेश की राजनीति और नीति निर्माण के केंद्र में आ गए हैं, जिनका असर आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक दिशा पर पड़ सकता है।