हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा डेयरी क्षेत्र में बड़े स्तर पर पहल की जा रही है। Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व में सरकार किसानों और दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि डेयरी व्यवसाय ग्रामीण परिवारों के लिए एक स्थायी और लाभदायक आय का स्रोत बन सके।
प्रदेश सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य के दूध उत्पादकों को वर्तमान में औसतन 34.18 करोड़ रुपये प्रतिमाह का वित्तीय लाभ प्राप्त हो रहा है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर माना जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर सृजित हुए हैं और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है।
🥛 दूध खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि
राज्य में दूध उत्पादन और खरीद में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में जहां औसतन 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन दूध की खरीद की जा रही थी, वहीं अब Himachal Pradesh Milkfed द्वारा यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 2.70 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है।
यह वृद्धि न केवल डेयरी क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित हो रही हैं।
🚜 घर-घर दूध संग्रहण से किसानों को राहत
सरकार ने दूरदराज क्षेत्रों के किसानों को ध्यान में रखते हुए घर-घर दूध संग्रहण की व्यवस्था सुनिश्चित की है। इससे दुग्ध उत्पादकों को बाजार तक पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिली है और उन्हें सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है।
इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
💰 दूध के खरीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि
राज्य सरकार ने दूध के खरीद मूल्य में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। वर्ष 2026-27 के बजट में गाय के दूध का मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
इस निर्णय से किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिल रहा है।
📊 सहकारी समितियों में बढ़ोतरी
सरकार के प्रयासों से ग्राम दुग्ध समितियों की सदस्य संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले तीन वर्षों में यह संख्या 27,498 से बढ़कर 39,790 हो गई है।
इसके अलावा दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या भी 583 से बढ़कर 758 हो गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि डेयरी क्षेत्र में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
🏭 आधुनिक डेयरी अवसंरचना
डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक अवसंरचना विकसित की जा रही है। वर्तमान में राज्य में 1.80 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के 11 दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र संचालित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा कांगड़ा जिले के ढगवार में 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसे भविष्य में 3 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकेगा।
🤝 राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग
डेयरी क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने National Dairy Development Board के साथ समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत कांगड़ा जिले में एक नया मिल्क यूनियन स्थापित किया जाएगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों के दुग्ध उत्पादकों को लाभ मिलेगा।
📚 प्रशिक्षण और तकनीकी सुधार
नई तकनीकों को अपनाने के लिए पिछले तीन वर्षों में 2,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 222 स्वचालित दूध संग्रहण इकाइयां और 32 डेटा प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं।
🗣️ मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गांव, किसान, महिलाएं और युवा राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके विकास के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
🔚 निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में डेयरी क्षेत्र में हो रही प्रगति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। सरकार की योजनाओं और पहलों से न केवल किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि राज्य में रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।