बजट पर रणधीर शर्मा का हमला, कहा दिशाहीन दस्तावेज

rakesh nandan

26/03/2026

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत बजट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे दिशाहीन और राजनीतिक भाषण करार दिया है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि बजट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज का उपयोग विकास की दिशा तय करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए किया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने भाषण में तथ्यों और ठोस आंकड़ों के बजाय विपक्ष और केंद्र सरकार की आलोचना में अधिक व्यस्त रहे।

उन्होंने कहा कि बजट का मूल उद्देश्य प्रदेश के आर्थिक भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करना होता है, लेकिन इस बजट में ऐसी कोई ठोस दिशा दिखाई नहीं देती। उन्होंने सरकार पर “भाजपा फोबिया” से ग्रस्त होने का आरोप भी लगाया।

रणधीर शर्मा ने Revenue Deficit Grant (RDG) के मुद्दे को भी पूरी तरह राजनीतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई स्थायी संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित अस्थायी व्यवस्था थी, जिसका समाप्त होना पहले से तय था। उनके अनुसार, सरकार इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रही है।

उन्होंने बजट के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार, इस वर्ष का कुल बजट आकार ₹54,928 करोड़ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹3,586 करोड़ कम है। इसके अलावा, राजस्व प्राप्तियां भी घटकर ₹44,537 करोड़ से ₹40,361 करोड़ होने का अनुमान है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश की कमिटेड लायबिलिटीज (वेतन, पेंशन, ब्याज और ऋण अदायगी) लगभग 80% तक पहुंच चुकी हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए मात्र 20% बजट ही बचता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकांश राशि पहले से तय खर्चों में चली जाती है, तो विकास कार्य कैसे संभव होंगे।

उन्होंने राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों को विफल बताते हुए कहा कि लगातार टैक्स और सेस बढ़ाने के बावजूद राजस्व में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महंगाई और ऊंचे करों के कारण लोग हिमाचल के बजाय पड़ोसी राज्यों में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे राज्य की आय प्रभावित हो रही है।

कर्ज के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले तीन वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर कर्ज लिया है और प्रदेश का कुल कर्ज ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है, जो एक गंभीर आर्थिक संकट की ओर संकेत करता है।

रणधीर शर्मा ने यह भी कहा कि बजट में निवेश बढ़ाने, उद्योगों को प्रोत्साहन देने और जीएसडीपी बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखाई देती। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली दरों में वृद्धि और औद्योगिक नीतियों की कमी के कारण निवेशक राज्य में आने से हिचक रहे हैं।

उन्होंने बजट घोषणाओं को “जुमला” बताते हुए कहा कि पिछली कई घोषणाएं आज भी अधूरी हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने, कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने, नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने और रोजगार सृजन जैसे वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों और युवाओं के लिए घोषित योजनाओं में भी स्पष्टता का अभाव है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली और ₹1500 सहायता योजना जैसी घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इनका वास्तविक लाभ लोगों तक कितना पहुंच रहा है, यह स्पष्ट नहीं है।

रणधीर शर्मा ने अंत में कहा कि प्रदेश की कई योजनाएं केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही हैं, फिर भी राज्य सरकार केंद्र को दोष देने का प्रयास कर रही है, जो विरोधाभासी है।

अपने वक्तव्य के समापन पर उन्होंने कहा कि यह बजट “दिशाहीन, गुमराह करने वाला और आर्थिक रूप से कमजोर दस्तावेज” है, जिसमें न आत्मनिर्भर हिमाचल की सोच है और न ही विकास का कोई स्पष्ट रोडमैप।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया, तो प्रदेश को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।