हिमाचल प्रदेश के बजट 2026–27 को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने बजट पर तीखा हमला बोलते हुए इसे जनविरोधी, युवा-विरोधी और विकास-विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बजट के जरिए अपनी आर्थिक नाकामी को छुपाने की असफल कोशिश की है।
गौरव कुमार ने कहा कि बजट के आंकड़े खुद प्रदेश की आर्थिक स्थिति की सच्चाई बयां कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग ₹54,928 करोड़ का बजट, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम बताया जा रहा है, और ₹6,000 करोड़ से अधिक का राजस्व घाटा यह दर्शाता है कि प्रदेश आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। उनके अनुसार सरकार के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं, न स्पष्ट योजना और न ही भविष्य को लेकर कोई ठोस विजन दिखाई देता है।
युवाओं के मुद्दे पर उन्होंने सरकार को सबसे ज्यादा घेरा। उन्होंने कहा कि इस बजट में प्रदेश के युवाओं के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। न तो रोजगार सृजन के लिए कोई बड़ी योजना लाई गई है और न ही बेरोजगारी कम करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल का युवा आज नौकरी की तलाश में भटक रहा है, लेकिन सरकार केवल वादों और घोषणाओं तक सीमित है। इसे उन्होंने युवाओं के सपनों के साथ विश्वासघात बताया।
उन्होंने आगे कहा कि बजट का आकार घटाना सीधे तौर पर विकास की गति को धीमा करने जैसा है। सड़कों, पर्यटन और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश की कमी साफ दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है, लेकिन सरकार के पास इसे कम करने की कोई ठोस रणनीति नहीं है।
गौरव कुमार ने कहा,
“यह सरकार विकास नहीं, बल्कि कर्ज और कटौती की राजनीति कर रही है।”
सरकार द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की सैलरी रोकने के फैसले पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार खुद अपने जनप्रतिनिधियों की सैलरी देने की स्थिति में नहीं है, तो यह प्रदेश की गंभीर आर्थिक स्थिति का संकेत है। ऐसे में विकास के बड़े दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाओं पर उन्होंने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना है कि ये घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आती हैं, क्योंकि इनके क्रियान्वयन को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जब तक योजनाओं को जमीन पर उतारने का स्पष्ट रोडमैप नहीं होगा, तब तक इन घोषणाओं का कोई वास्तविक लाभ जनता को नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने बजट को घोषणाओं का पुलिंदा बताते हुए कहा कि इसका जमीनी हकीकत से कोई सीधा संबंध नहीं दिखता। उनके अनुसार सरकार ने बड़े-बड़े वादे तो किए हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधनों और रणनीति की कमी साफ नजर आती है।
अंत में गौरव कुमार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हिमाचल प्रदेश को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि युवाओं के लिए तत्काल रोजगार और स्वरोजगार की ठोस नीति बनाई जाए, राज्य की आय बढ़ाने के लिए नए स्रोत विकसित किए जाएं और उद्योग व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट रणनीति तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का रोडमैप नहीं है, बल्कि सरकार की नीतिगत कमजोरियों का आईना है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में इसका सबसे अधिक असर प्रदेश के युवाओं पर पड़ेगा।