हिमाचल प्रदेश में प्रस्तुत किए गए ₹54,928 करोड़ के बजट को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने इस बजट को प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सरकार की नीतियों की विफलता का प्रतीक बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
युवा मोर्चा के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किया गया यह बजट आम जनता, विशेषकर युवाओं की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में की गई घोषणाएं केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास हैं, जबकि इनके क्रियान्वयन को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
विशेष रूप से महिलाओं को ₹1500 पेंशन और गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। युवा मोर्चा का कहना है कि इन योजनाओं के लिए न तो स्पष्ट बजट प्रावधान दिखता है और न ही इनके लागू होने की ठोस समयसीमा बताई गई है। ऐसे में यह घोषणाएं केवल कागजी साबित हो सकती हैं।
सबसे गंभीर मुद्दा सरकार द्वारा लिया गया वह निर्णय बताया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर ग्रुप-बी कर्मचारियों तक के वेतन को 6 महीने तक स्थगित करने की बात सामने आई है। युवा मोर्चा ने इसे प्रदेश की आर्थिक बदहाली का स्पष्ट संकेत बताया है। उनका कहना है कि यदि सरकार अपने कर्मचारियों का वेतन समय पर देने में सक्षम नहीं है, तो यह वित्तीय प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है।
युवा मोर्चा ने यह भी कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार, स्टार्टअप और नए अवसरों की उम्मीद कर रहा था, लेकिन इस बजट में युवाओं के लिए कोई ठोस योजना नजर नहीं आती। न तो रोजगार सृजन के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं और न ही स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कोई विशेष प्रावधान किया गया है।
अपने बयान में युवा मोर्चा ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा,
“वेतन रोककर सरकार चला रहे हैं, और युवाओं को भविष्य देने की बात कर रहे हैं!”
उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं के साथ अन्याय है और इससे प्रदेश के विकास की गति प्रभावित हो सकती है। संगठन ने इसे युवा विरोधी और दिशाहीन बजट करार दिया है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि वह इस बजट के खिलाफ प्रदेशभर में आवाज उठाएगा और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बजट में किए गए प्रावधानों को स्पष्ट किया जाए और युवाओं के लिए ठोस योजनाएं लाई जाएं।
इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और भी गरमा सकती है, क्योंकि विपक्ष और विभिन्न संगठन इस बजट को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और बजट में किए गए वादों को किस प्रकार लागू करती है।