जनक राज का कांग्रेस पर हमला, रोबोटिक सर्जरी पर सवाल

rakesh nandan

31/03/2026

हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने सेब बागवानों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा नेता एवं विधायक Dr. Janak Raj ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी सेब बागवानों को डराने और गुमराह करने के लिए झूठी राजनीति कर रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों (FTA) को लेकर कांग्रेस की बयानबाजी को भ्रामक बताया।

सेब आयात को लेकर क्या बोले जनक राज

डॉ. जनक राज ने कहा कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सेब आयातक है और वर्ष 2024-25 में करीब 5.57 लाख मीट्रिक टन सेब का आयात हुआ, जो घरेलू उत्पादन का लगभग 21.9 प्रतिशत है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि European Union के साथ हुए समझौते में सेब आयात के लिए सीमित कोटा (TRQ) तय किया गया है, जो मौजूदा आयात से भी कम है। इसके अलावा न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) ₹80 प्रति किलो निर्धारित किया गया है, जिससे सस्ते विदेशी सेब भारतीय बाजार में नहीं आ पाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब विदेशी सेब पर ढुलाई, कोल्ड स्टोरेज और अन्य खर्च जुड़ते हैं, तो उनकी कीमत ₹120 से ₹150 प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जो हिमाचल के स्थानीय सेब से अधिक है। ऐसे में विदेशी सेब प्रीमियम श्रेणी में ही रहेंगे और स्थानीय बागवानों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

डॉ. जनक राज ने यह भी कहा कि New Zealand और United States के साथ भी केवल प्रीमियम सेगमेंट के सेब आयात की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि “तथ्यों की जानकारी के बिना केवल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है।”


रोबोटिक सर्जरी पर सरकार घिरी

वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री Vipin Singh Parmar ने प्रदेश सरकार पर स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि हाई-टेक स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद में पारदर्शिता की कमी है। उनके अनुसार टांडा और चमियाना मेडिकल कॉलेजों में लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत से मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया को लेकर सरकार स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है।

परमार ने सवाल उठाया कि ई-टेंडरिंग के माध्यम से किस आधार पर विदेशी कंपनी को ठेका दिया गया और कितनी कंपनियों ने इसमें भाग लिया—इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।

आम आदमी की पहुंच से बाहर तकनीक

उन्होंने कहा कि जहां सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी 20 से 25 हजार रुपये में हो जाती है, वहीं रोबोटिक सर्जरी का खर्च डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रहा है। ऐसे में यह सुविधा आम लोगों के बजाय केवल सीमित वर्ग तक ही सिमट कर रह गई है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या Ayushman Bharat Yojana और Himcare Yojana के तहत इन सर्जरी का लाभ मिल रहा है या नहीं।

स्वास्थ्य ढांचे पर भी सवाल

विपिन परमार ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई अस्पतालों में डॉक्टर, तकनीशियन और आवश्यक उपकरणों की भारी कमी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय महंगी तकनीकों पर ध्यान दे रही है, जबकि आम मरीजों को बुनियादी इलाज तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

पारदर्शिता की मांग

परमार ने सरकार से रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद, लागत और उपयोग से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तकनीक का विरोध नहीं है, लेकिन प्राथमिकता तय करना जरूरी है।


निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानों के मुद्दे और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है। एक ओर जहां सेब आयात नीति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सुविधाओं में पारदर्शिता और प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में ये मुद्दे प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माहट ला सकते हैं।