108-102 एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

rakesh nandan

08/04/2026

हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। Students’ Federation of India के बजाय इस आंदोलन का नेतृत्व Centre of Indian Trade Unions (सीटू) से संबंधित एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन कर रही है। प्रदेशभर से सैकड़ों कर्मचारी शिमला के छोटा शिमला स्थित सचिवालय के बाहर बारिश के बावजूद डटे रहे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

यूनियन के अनुसार, पांच दिन की इस प्रदेशव्यापी हड़ताल के दौरान तीसरे दिन भी एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह से बाधित रहीं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ेंगे।

धरने को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, उपाध्यक्ष सुदेश कुमारी, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने कहा कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत MedSwan Foundation के अधीन काम कर रहे एंबुलेंस कर्मचारी लंबे समय से शोषण का शिकार हैं।

यूनियन नेताओं का आरोप है कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा उनसे 12 घंटे तक ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि यह स्थिति श्रम कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और अन्य न्यायिक संस्थाओं के आदेशों के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। कई वर्षों से कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

यूनियन के अनुसार, जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कई मामलों में यूनियन नेताओं का तबादला कर दिया जाता है या उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ कर्मचारियों को बिना कारण लंबे समय तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।

इसके अलावा, ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर खामियों का आरोप लगाया गया है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन से दोनों शेयर काटे जा रहे हैं, जिससे हर महीने उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही, कर्मचारियों का बेसिक वेतन भी काफी कम है, जिसे बढ़ाने की मांग की गई है।

यूनियन ने अपनी प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन का भुगतान, ओवरटाइम का उचित भुगतान, सभी प्रकार की छुट्टियों का प्रावधान, वाहन मेंटेनेंस के दौरान वेतन कटौती रोकना और न्यायालयों के आदेशों को लागू करना शामिल किया है। इसके अलावा, कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि उन्हें संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत प्राप्त अधिकारों की सुरक्षा दी जाए।

यूनियन ने यह भी मुद्दा उठाया कि पूर्व में ये कर्मचारी GVK EMRI के अधीन कार्यरत थे, लेकिन सेवा समाप्ति के बाद उन्हें ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य बकाया भुगतान नहीं मिला। कर्मचारियों ने इन सभी लंबित भुगतानों को तुरंत जारी करने की मांग की है।

प्रदेश में जारी इस हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रभाव डाला है, क्योंकि 108 और 102 जैसी आपातकालीन सेवाएं आम जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वे जल्द से जल्द इस विवाद का समाधान निकालें।

कुल मिलाकर, एंबुलेंस कर्मचारियों की यह हड़ताल श्रमिक अधिकारों, न्यूनतम वेतन और कार्य परिस्थितियों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उजागर करती है। अब यह देखना होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इन मांगों पर क्या कदम उठाती हैं।