हिमाचल में कृषि संकट पर केंद्र का जवाब, आंकड़े जारी

rakesh nandan

17/03/2026

हिमाचल प्रदेश में कृषि संकट और किसानों की स्थिति को लेकर लोकसभा में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार ने विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की है। भाजपा लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्य में किसानों की स्थिति, प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दी जा रही सहायता का विस्तृत ब्यौरा दिया।

सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा था कि क्या हिमाचल प्रदेश, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, ओलावृष्टि और जंगली जानवरों के कारण फसलों को नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी मांगी थी।

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनियमितताओं के कारण किसानों को समय-समय पर नुकसान उठाना पड़ता है। हालांकि, ऐसी परिस्थितियों में राहत उपलब्ध कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है, लेकिन केंद्र सरकार भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को सहयोग प्रदान कर रही है।

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, शिमला संसदीय क्षेत्र में लगभग 2,06,563 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जाती है और यहां 2,60,515 किसान कृषि कार्य में संलग्न हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख फसलों में मक्का (49,456 हेक्टेयर), गेहूं (50,277 हेक्टेयर), धान (9,933 हेक्टेयर), जौ (4,385 हेक्टेयर), आलू (7,500 हेक्टेयर) और सब्जियां (41,597.5 हेक्टेयर) शामिल हैं।

प्राकृतिक आपदाओं से राहत के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) और राज्य आपदा मोचन कोष (SDRF) के माध्यम से राज्यों को सहायता प्रदान करती है। वर्ष 2025-26 के लिए हिमाचल प्रदेश को SDRF के तहत केंद्र की ओर से ₹397.60 करोड़ और राज्य हिस्से के रूप में ₹44 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इनमें से केंद्र सरकार का हिस्सा पहले ही जारी किया जा चुका है।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में 2,564 फसल क्षति के मामले दर्ज किए गए, जिनमें किसानों को राहत के रूप में ₹136.72 लाख वितरित किए गए। वहीं वर्ष 2025-26 में अब तक 356 मामलों की जानकारी सामने आई है।

किसानों को फसल नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भी लागू है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच हिमाचल प्रदेश के 5,79,605 किसानों के दावों के लिए कुल ₹376.79 करोड़ का भुगतान किया गया है। इनमें से शिमला संसदीय क्षेत्र के 54,935 किसानों को ₹47.58 करोड़ की राशि प्रदान की गई।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जा रही है। हिमाचल प्रदेश के किसानों को अब तक ₹373.32 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं वर्ष 2025-26 की 22वीं किस्त के रूप में 81,852 किसानों को ₹16.37 करोड़ की सहायता प्रदान की गई है।

केंद्र सरकार की अन्य कृषि योजनाओं का भी राज्य के किसानों को लाभ मिल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021-22 में 36,163, 2022-23 में 39,207, 2023-24 में 39,791, 2024-25 में 42,829 और 2025-26 में 47,443 किसान इन योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना, कृषि अवसंरचना कोष, किसान उत्पादक संगठन (FPO), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और प्राकृतिक खेती मिशन शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता, फसल बीमा, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिससे हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने में मदद मिल रही है।

यह स्पष्ट है कि बदलते मौसम और प्राकृतिक चुनौतियों के बीच सरकार की विभिन्न योजनाएं किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में कृषि को और अधिक मजबूत करने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष रणनीतियों की आवश्यकता है।