हिमाचल प्रदेश में केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लेकर विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों ने विकास कार्यों की स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है। भाजपा नेताओं Sudhir Sharma, Vinod Kumar और Randhir Sharma द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या 4145 के उत्तर में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
विधानसभा में दिए गए आधिकारिक जवाब के अनुसार, 01 जनवरी 2023 से 31 जनवरी 2026 तक के तीन वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश में कुल 331 योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं की कुल लागत ₹2513.65 करोड़ बताई गई है, जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से मंजूर की गई हैं।
यदि वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023-24 में 180 योजनाओं को स्वीकृति मिली, जिनकी लागत ₹1120.21 करोड़ रही। इसके बाद वर्ष 2024-25 में 80 योजनाएं मंजूर की गईं, जिनकी कुल लागत ₹685.95 करोड़ रही। वहीं वर्ष 2025-26 में 71 योजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी लागत ₹707.49 करोड़ है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा लगातार हिमाचल प्रदेश को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
भाजपा विधायकों ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रदेश के विकास के लिए निरंतर सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति, सड़क, सिंचाई और आधारभूत ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, ताकि प्रदेश के हर हिस्से में संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
हालांकि, भाजपा नेताओं ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में योजनाओं की स्वीकृति के बावजूद राज्य सरकार उनके प्रभावी क्रियान्वयन में पीछे रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर निगरानी और निर्णय लेने में देरी के कारण कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।
विधानसभा में यह भी जानकारी दी गई कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्यांश (State Share) के रूप में 10 प्रतिशत तक का प्रावधान रखा गया है। यह राशि राज्य के वित्त विभाग द्वारा वहन की जाएगी। इसके बावजूद भाजपा विधायकों का कहना है कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति और निर्णयहीनता के कारण कई परियोजनाएं धरातल पर आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है, जबकि केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो रहा है। यदि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, तो प्रदेश में विकास की गति कई गुना बढ़ सकती है और आम जनता को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
भाजपा विधायकों ने मांग की कि सभी स्वीकृत योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और उनकी प्रगति की निगरानी मजबूत की जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि केंद्र द्वारा दी गई प्रत्येक राशि का सही उपयोग हो सके।
यह मुद्दा न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि विकास के दृष्टिकोण से भी अहम है। प्रदेश में स्वीकृत योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
कुल मिलाकर, विधानसभा में सामने आए ये आंकड़े एक ओर जहां केंद्र सरकार के सहयोग को दर्शाते हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य में योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल भी खड़े करते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।