भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे पूरी तरह विफल और प्रदेश को आर्थिक संकट की ओर ले जाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट न केवल विकास की गति को धीमा करेगा, बल्कि राज्य को वित्तीय अस्थिरता की ओर धकेल रहा है।
हर्ष महाजन ने कहा कि इस वर्ष का बजट आकार ₹54,928 करोड़ रखा गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में यह ₹58,514 करोड़ था। इस प्रकार लगभग ₹3,500 करोड़ की कटौती की गई है, जो प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है। उन्होंने इसे सरकार की आर्थिक कमजोरी का स्पष्ट संकेत बताया।
उन्होंने बजट का विश्लेषण करते हुए बताया कि सरकार के पास विकास कार्यों के लिए बहुत सीमित संसाधन बचते हैं। उनके अनुसार बजट का बड़ा हिस्सा अनिवार्य खर्चों में ही समाप्त हो जाता है—
- 27% वेतन पर खर्च
- 21% पेंशन पर
- 13% ब्याज भुगतान पर
- 9% कर्ज की मूलधन अदायगी पर
- 10% विभिन्न संस्थानों को ग्रांट में
इन सभी खर्चों के बाद सरकार के पास केवल 20% राशि ही बचती है, जिससे पूरे प्रदेश के विकास कार्यों को पूरा करना होता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा।
महाजन ने प्रदेश की बढ़ती कर्ज स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगभग ₹45,000 करोड़ का नया कर्ज लिया गया है और अब कुल कर्ज ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। उन्होंने बताया कि बजट का लगभग 22% हिस्सा केवल कर्ज चुकाने में ही खर्च हो रहा है, जिससे विकास के लिए उपलब्ध धन और भी कम हो जाता है।
उन्होंने सरकार की घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को ₹1500 देने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और विभिन्न योजनाओं के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के वादे किए जा रहे हैं, लेकिन जब बजट का आकार घट गया है और विकास के लिए संसाधन सीमित हैं, तो इन योजनाओं को लागू करने के लिए धन कहां से आएगा?
हर्ष महाजन ने यह भी कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार को ₹58,514 करोड़ के बजट के बाद ₹40,461 करोड़ का अनुपूरक बजट लाना पड़ा था, जो वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण है। उन्होंने आशंका जताई कि इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति दोहराई जा सकती है।
उन्होंने विकास के लिए बजट में घटती हिस्सेदारी को भी गंभीर चिंता का विषय बताया—
- 2023-24 में 29%
- 2024-25 में 28%
- 2025-26 में 24%
- 2026-27 में केवल 20%
उन्होंने कहा कि यह गिरावट दर्शाती है कि प्रदेश की विकास दर लगातार धीमी हो रही है और सरकार के पास ठोस आर्थिक रणनीति का अभाव है।
महाजन ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को “वेंटिलेटर” पर बताते हुए कहा कि कैश फ्लो की स्थिति बिगड़ चुकी है और सरकार केवल घोषणाओं के सहारे चल रही है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए—क्या सरकार बिना नया कर्ज लिए वर्ष पूरा कर पाएगी? क्या कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और विकास कार्यों के बीच संतुलन बना पाएगी? और क्या फिर से भारी अनुपूरक बजट लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी?
अंत में हर्ष महाजन ने कहा कि यह बजट केवल कागजी घोषणाओं और राजनीतिक वादों का पुलिंदा है, जिसमें न तो वित्तीय मजबूती है और न ही विकास का कोई स्पष्ट रोडमैप दिखाई देता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट या आपातकाल जैसी स्थिति का सामना कर सकता है।