हरोली में 20 करोड़ से प्राचीन तालाबों का पुनर्जीवन

rakesh nandan

07/01/2026

हरोली विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक व्यापक और दूरदर्शी पहल की जा रही है। क्षेत्र के प्राचीन तालाबों (टोबों) को पुनर्जीवित कर उन्हें आधुनिक, सुंदर और बहुउद्देशीय सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल के पीछे हरोली के विधायक एवं उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की दूरदर्शी सोच और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्ध दृष्टिकोण है। वर्षों से उपेक्षित पड़े पारंपरिक टोबों को नया जीवन देकर हरोली में जल संरक्षण का एक सतत और अनुकरणीय मॉडल विकसित किया जा रहा है।

प्राचीन टोबों से आधुनिक सरोवरों तक

हरोली क्षेत्र के गांव-गांव में फैले पारंपरिक तालाब कभी वर्षा जल संग्रहण, पशुओं के पेयजल और सिंचाई का प्रमुख साधन हुआ करते थे। समय के साथ ये जल स्रोत देखरेख के अभाव में लुप्तप्राय हो गए थे। अब इन तालाबों को आधुनिक तकनीक से पुनर्जीवित कर आकर्षक सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता, जलीय जीवन, ग्रामीण पर्यटन और पंचायतों की संभावित आय को भी बढ़ावा मिल रहा है।

पूरे प्रदेश के लिए प्रेरक मॉडल

हरोली में तालाब संरक्षण की यह पहल उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के पहले विधायक कार्यकाल से निरंतर जारी है। वर्तमान में इसे और अधिक व्यापक स्वरूप दिया गया है। तालाबों के चारों ओर पैदल पथ, हरियाली, सौंदर्यीकरण और स्वच्छता से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

जल संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत – मुकेश अग्निहोत्री

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हरोली में तालाबों और टोबों का पुनरुद्धार केवल एक विकासात्मक परियोजना नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प है। ये पारंपरिक जल स्रोत भविष्य में जल सुरक्षा की मजबूत नींव सिद्ध होंगे और पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाएंगे।

अधिकारियों की राय

जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशाषी अभियंता पुनीत शर्मा ने बताया कि तालाबों के सौंदर्यीकरण, जल संचयन और ग्रामीण जल निकासी के लिए जल शक्ति विभाग, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के संयुक्त कन्वर्जेंस के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल शक्ति विभाग द्वारा लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि शेष राशि अन्य विभागों द्वारा चरणबद्ध तरीके से व्यय की जा रही है।