जिला हमीरपुर में पंचायतों के पुनर्गठन के बाद जिला परिषद वार्डों के परिसीमन में आंशिक संशोधन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत जिला परिषद के कुल 19 वार्डों में से 10 वार्ड प्रभावित हुए हैं, जिनके संशोधित परिसीमन का प्रारूप 16 मार्च को प्रकाशित कर दिया गया है।
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) गंधर्वा राठौड़ ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए जानकारी दी कि प्रभावित वार्डों में पनोह, उहल, चमनेड, बधानी, धमरोल, जाहू, महल, लहड़ा, अमलैहड़ और सपड़ोह शामिल हैं। इन सभी वार्डों की सीमाओं में आंशिक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
उन्होंने बताया कि यह संशोधन पंचायतों के पुनर्गठन के कारण आवश्यक हो गया है। जब पंचायतों की सीमाओं में बदलाव किया जाता है, तो उसके अनुरूप जिला परिषद के वार्डों का परिसीमन भी संशोधित करना पड़ता है, ताकि प्रतिनिधित्व संतुलित और व्यवस्थित बना रहे।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि इन वार्डों के संशोधित परिसीमन का केवल प्रारूप जारी किया गया है और इसे अंतिम रूप देने से पहले आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। यदि किसी व्यक्ति को इस परिसीमन के संबंध में कोई आपत्ति है या वह कोई सुझाव देना चाहता है, तो वह इसे जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) के कार्यालय में दर्ज करवा सकता है।
इसके लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है। उपायुक्त ने बताया कि प्रारूप के प्रकाशन की तिथि से तीन दिन के भीतर ही आपत्तियां और सुझाव स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद किसी भी प्रकार की आपत्ति या सुझाव पर विचार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें परिसीमन से संबंधित कोई भी समस्या या सुझाव है, तो वे निर्धारित समय के भीतर इसे लिखित रूप में प्रस्तुत करें। इससे प्रशासन को अंतिम निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और परिसीमन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहभागी बन सकेगी।
परिसीमन की यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले और जनसंख्या के अनुपात में वार्डों का निर्धारण किया जाए। इससे चुनाव प्रक्रिया भी अधिक निष्पक्ष और संतुलित बनती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर परिसीमन करना आवश्यक होता है, क्योंकि जनसंख्या और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव आते रहते हैं। यदि परिसीमन नहीं किया जाए, तो कुछ क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है, जिससे विकास कार्यों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
जिला प्रशासन द्वारा यह कदम स्थानीय शासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया है। इससे पंचायत और जिला परिषद स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होने की संभावना है।
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उसके बाद ही अंतिम परिसीमन अधिसूचना जारी की जाएगी।
यह प्रक्रिया आगामी पंचायत चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि परिसीमन के आधार पर ही वार्डों की सीमाएं तय होती हैं और उसी के अनुसार चुनाव आयोजित किए जाते हैं।
अंत में, जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं और समय पर अपने सुझाव प्रस्तुत करें, ताकि एक संतुलित और प्रभावी प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा सके।