हमीरपुर में 100 दिन का टीबी जांच अभियान शुरू

rakesh nandan

24/03/2026

विश्व टीबी दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने मंगलवार को “टीबी मुक्त अभियान” के तहत 100 दिवसीय स्क्रीनिंग अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य जिले में टीबी के संभावित मरीजों की पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।

उपायुक्त ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष अभियान के तहत जिले की कुल अनुमानित 5.15 लाख आबादी में से चयनित 432 गांवों के लगभग 1.70 लाख लोगों की प्रारंभिक जांच की जाएगी। यह अभियान विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित है, जिन्हें टीबी संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

उन्होंने बताया कि जांच के लिए प्राथमिकता उन व्यक्तियों को दी जाएगी, जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है या जो हाइपरटेंशन, बीपी, शुगर और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिससे उन्हें टीबी होने की संभावना अधिक रहती है।

इस अभियान के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही व्यापक तैयारियां कर ली हैं। उपायुक्त ने बताया कि विभिन्न टीमों का गठन किया गया है, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। इन टीमों में आशा वर्कर्स, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी और आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी भी शामिल होंगे।

अभियान की खास बात यह है कि फील्ड में ही आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए लोगों की जांच की जाएगी। इसके लिए तीन पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे मौके पर ही लोगों की जांच संभव हो सकेगी। इसके अलावा, स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास रहने वाले लोगों के एक्सरे संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर भी किए जाएंगे।

उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि हमीरपुर जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को जांच करने में मदद करें।

उन्होंने यह भी कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है। यदि इसका समय रहते पता चल जाए, तो इसका इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को टीबी के लक्षण जैसे लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए।

उपायुक्त ने लोगों को यह भी जागरूक किया कि यदि जांच में टीबी की पुष्टि होती है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार और दवाइयों का नियमित सेवन करने से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से यह जोर दिया कि मरीजों को दवा की कोई भी खुराक नहीं छोड़नी चाहिए और पूरी उपचार अवधि तक दवा लेना आवश्यक है।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. प्रवीण चौधरी, जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समाज में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि समय रहते मरीजों की पहचान कर उन्हें उचित उपचार प्रदान किया जाए, ताकि टीबी को जड़ से समाप्त किया जा सके।

अंत में प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने तथा अपने परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करें।