हमीरपुर में महिलाओं को सॉफ्ट टॉय प्रशिक्षण पूरा

rakesh nandan

20/03/2026

हमीरपुर के मट्टनसिद्ध स्थित पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। संस्थान द्वारा आयोजित 14 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण शिविर में 28 महिलाओं को सॉफ्ट टॉय (खिलौने) बनाने का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे स्वरोजगार के नए अवसरों की ओर कदम बढ़ा सकें।

मुख्य अतिथि ने किया मार्गदर्शन

समापन समारोह में नीरज कुमार आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं आसानी से अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि महिलाएं:

  • स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाएं

  • सामूहिक रूप से कारोबार शुरू करें

  • बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाएं

बैंक योजनाओं की दी जानकारी

मुख्य अतिथि ने महिलाओं को विभिन्न वित्तीय योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया, जिनमें शामिल हैं:

  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

  • अटल पेंशन योजना

इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल बैंकिंग, ऋण योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को:

  • आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं

  • स्वरोजगार के अवसर प्रदान करते हैं

  • कौशल विकास को बढ़ावा देते हैं

सॉफ्ट टॉय निर्माण जैसे कार्यों से महिलाएं घर बैठे भी आय अर्जित कर सकती हैं।

संस्थान की भूमिका

संस्थान के निदेशक अजय कतना ने बताया कि आरसेटी लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रशिक्षण से जुड़े सभी प्रतिभागियों, ट्रेनरों और अतिथियों का धन्यवाद किया।

अन्य गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर:

  • मूल्यांकनकर्ता सोमदत्त शर्मा

  • नीलम राणा

  • फैकल्टी सदस्य संजय हरनोट

  • ट्रेनर पुष्पा देवी

सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

हमीरपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। ऐसे कार्यक्रम न केवल महिलाओं के कौशल को निखारते हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर समाज में उनकी भागीदारी भी बढ़ाते हैं।