विश्व टीबी दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जिला हमीरपुर में जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में मंगलवार को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), हमीरपुर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इस बीमारी के प्रति सही जानकारी पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश रत्तू, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक राज कुमार तथा टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के पर्यवेक्षक जीवन कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए टीबी के प्रति जागरूक रहने, समय पर जांच करवाने और उपचार को नियमित रूप से जारी रखने के महत्व पर बल दिया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। इनमें पोस्टर मेकिंग, मेहंदी और भाषण प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया, बल्कि टीबी जैसे गंभीर रोग के प्रति जागरूकता का संदेश भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
मेहंदी प्रतियोगिता में स्वाति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मलिका ने द्वितीय और संदेश ने तृतीय स्थान हासिल किया। इसी प्रकार पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में ज्योति भारती और तरनजीत कौर ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। अलैक्सी और दीक्षा द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि पलक और संजना ने तृतीय स्थान हासिल किया। भाषण प्रतियोगिता में राखी ने प्रथम, मेहा ने द्वितीय और प्रिया शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रमेश रत्तू ने विद्यार्थियों को टीबी रोग के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने इसके प्रमुख लक्षणों जैसे लगातार खांसी, बुखार, वजन में कमी और कमजोरी के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने यह भी बताया कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते इसका समय पर निदान हो और मरीज नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करे। सरकार द्वारा टीबी मरीजों को निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही मरीजों को पोषण सहायता भी दी जाती है, ताकि वे जल्द स्वस्थ हो सकें।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के प्रधानाचार्य सुभाष चंद शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना समय की आवश्यकता है, और ऐसे कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे न केवल स्वयं जागरूक रहें, बल्कि अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी टीबी के प्रति जागरूक करें। इस प्रकार के प्रयासों से ही टीबी मुक्त समाज के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
यह कार्यक्रम न केवल जानकारी प्रदान करने तक सीमित रहा, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करने में सफल रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस तरह के आयोजन भविष्य में भी जारी रखने की बात कही गई है, ताकि समाज के हर वर्ग तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया जा सके।