हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ की अध्यक्षता में हमीर भवन में आयोजित वार्षिक समीक्षा बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को नियमित रूप से दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएं और उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले।
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एआरटी (Antiretroviral Therapy) सेंटर के माध्यम से मरीजों को आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से भी जोड़ा जाए, ताकि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए बनाए गए अधिनियमों और नियमों की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मरीजों की पहचान को गोपनीय रखना भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि उनकी गरिमा और सम्मान बना रहे।
बैठक में बताया गया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल हमीरपुर में स्थापित एआरटी सेंटर के माध्यम से न केवल हमीरपुर बल्कि बिलासपुर, मंडी, ऊना और कांगड़ा जिलों के कुछ क्षेत्रों के मरीजों को भी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस केंद्र के माध्यम से कुल 1,453 एचआईवी संक्रमित और एड्स के मरीजों को नियमित दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिनमें से 953 मरीज हमीरपुर जिले के हैं।
उपायुक्त ने कहा कि एचआईवी-एड्स से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। यदि लोग, विशेषकर युवा, इसके प्रति जागरूक रहें तो इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि गर्भवती महिला में समय रहते एचआईवी संक्रमण का पता चल जाए, तो उचित इलाज के माध्यम से बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से सरकार ने सभी गर्भवती महिलाओं के लिए एचआईवी टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। यदि किसी महिला में संक्रमण पाया जाता है, तो उसे तुरंत दवाइयां शुरू कर दी जाती हैं, जिससे नवजात को सुरक्षित रखा जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति यदि अपनी जीवनशैली को संतुलित रखे और नियमित रूप से दवाइयां लेता रहे, तो वह लंबा और सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए भी विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि वे फील्ड स्तर पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों में गठित रेड रिबन क्लबों को सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए, ताकि युवा वर्ग को इस विषय में सही जानकारी मिल सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों और उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता, परिवहन सुविधा, शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से संबंधित योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। उपायुक्त ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे पात्र लाभार्थियों तक इन योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाएं।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी, मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देशराज शर्मा और जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी सुनील वर्मा ने विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
अंत में कहा जा सकता है कि हमीरपुर जिला प्रशासन एचआईवी-एड्स के खिलाफ न केवल उपचार बल्कि जागरूकता और सामाजिक समर्थन के माध्यम से भी एक व्यापक अभियान चला रहा है, जिससे मरीजों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिल सके।
