हमीरपुर में स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा, HPV टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय हमीरपुर के सभागार में जिला स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने की। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नेहा पटियाल, विभिन्न खंडों के चिकित्सा अधिकारी, जिला सूचना एवं सम्प्रेषण अधिकारी सुनील रांगड़ा, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक तथा ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
HPV टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के निर्देश
बैठक में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण अभियान की समीक्षा करते हुए डॉ. अजय अत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों का टीकाकरण अभी तक नहीं हो पाया है, उनकी पहचान कर जल्द से जल्द टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से स्कूलों और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कहा, ताकि अभिभावक टीकाकरण के महत्व को समझ सकें।
गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण पर जोर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि जिले की सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में पंजीकरण होने से महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं और परामर्श समय पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, पोषण संबंधी जानकारी और सुरक्षित मातृत्व सेवाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश
बैठक में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान डॉ. अजय अत्री ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान ही महिलाओं को परिवार नियोजन के विभिन्न उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रसव पूर्व अवधि में उचित परामर्श देने से महिलाएं परिवार नियोजन के बारे में बेहतर निर्णय ले सकती हैं। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के साथ जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों को भी बल मिलेगा।
जननी सुरक्षा योजना का लाभ सभी पात्र महिलाओं तक पहुंचे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को समय पर लाभ प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और मातृ मृत्यु दर को कम करना है। इसलिए किसी भी पात्र महिला को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा
बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की भी समीक्षा की गई। डॉ. अजय अत्री ने कहा कि बच्चों में जन्मजात विकृतियों, विकास संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों की जल्द पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए।
प्रथम रेफरल इकाई के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश
डॉ. अजय अत्री ने सुजानपुर, भोरंज, नादौन और बड़सर खंडों को प्रथम रेफरल इकाई (First Referral Unit) के गठन के लिए अपने प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी
बैठक में कोटपा (COTPA) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि खुले रूप में सिगरेट बेचने पर प्रतिबंध है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना एवं कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने दुकानदारों को चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हो कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को बीड़ी और सिगरेट नहीं बेची जाएगी।
नवजात शिशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान
डॉ. अजय अत्री ने होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए बताया कि आशा कार्यकर्ता नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए घर-घर जाकर सात निर्धारित दौरे करती हैं। उन्होंने कहा कि इन दौरों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि नवजात शिशुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा सके।
एनीमिया और पोषण सुधार पर फोकस
बैठक के अंत में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने महिलाओं और बच्चों में एनीमिया तथा कुपोषण की समस्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को पोषण सुधार और एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए जागरूकता अभियान, नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण संबंधी परामर्श को और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सभी योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।