S.P. Katyal ने हमीरपुर जिले के दौरे के दौरान खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। हमीर भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले की सभी 320 उचित मूल्य की दुकानों में साफ-सफाई, खाद्यान्नों का सुरक्षित भंडारण और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उचित मूल्य की दुकानों को साफ-सुथरा और आकर्षक बनाया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव मिल सके। साथ ही दुकान संचालकों को इस दिशा में प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. कत्याल ने कहा कि खाद्यान्नों की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने फील्ड अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से उचित मूल्य की दुकानों, गोदामों और आटा मिलों का निरीक्षण करें। इसके साथ ही सैंपलिंग और टेस्टिंग प्रक्रिया को भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, ताकि खाद्यान्नों की गुणवत्ता बनी रहे।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी संबंधित स्थानों पर शिकायत नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, जिससे उपभोक्ता किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज करवा सकें। इसके अतिरिक्त, एनएफएसए के तहत आवंटित गेहूं की पिसाई के समय आटा मिलों में अधिकारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित करने को कहा गया।
यदि कोई उचित मूल्य की दुकान बेहतर तरीके से संचालित हो रही है, तो उसकी अनुशंसा आईएसओ सर्टिफिकेशन के लिए किए जाने की बात भी उन्होंने कही। इससे दुकानों के संचालन में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों में सुधार आने की संभावना है।
National Food Security Act (NFSA) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए डॉ. कत्याल ने कहा कि सभी पात्र लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए पंचायतीराज संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। विशेष रूप से दिव्यांग, बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई गई।
उन्होंने यह भी बताया कि खाद्य आयोग ऐसे जरूरतमंद लोगों के घर तक खाद्यान्न पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है और इस संबंध में सरकार को सुझाव भेजे जाएंगे।
जिले में 1351 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को दिए जाने वाले पूरक पोषाहार पर भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को इस पोषण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही गंभीर कुपोषण से ग्रस्त बच्चों के उपचार के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।
उन्होंने आंगनवाड़ी वर्कर्स और आशा वर्कर्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जमीनी स्तर पर इनकी सक्रिय भागीदारी से ही योजनाओं का सही क्रियान्वयन संभव है।
शिक्षा विभाग को निर्देश देते हुए डॉ. कत्याल ने स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत स्वच्छता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत एसओपी जारी करने को कहा। साथ ही सभी स्कूलों में नियमित निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और विभिन्न विभागों से फीडबैक एवं सुझाव आमंत्रित किए गए।
इस अवसर पर एडीसी अभिषेक गर्ग ने डॉ. कत्याल का स्वागत करते हुए जिले में खाद्य सुरक्षा के लिए किए गए उपायों की जानकारी दी। जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक शिव राम और अन्य अधिकारियों ने भी अपने-अपने विभागों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कुल मिलाकर, इस समीक्षा बैठक के माध्यम से हमीरपुर जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। आने वाले समय में इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से आम जनता को बेहतर और सुरक्षित खाद्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है।