राजकीय बहुततकनीकी महाविद्यालय, बड़ू-हमीरपुर में चल रहे पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का तीसरा दिन भी तकनीकी ज्ञान और प्रयोगात्मक गतिविधियों से समृद्ध रहा। इस दिन प्रतिभागियों के लिए एआई (AI) और आईओटी (IoT) से संबंधित विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।
एनएलपी और एआई पर पहला सत्र
एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप सिंह ने “प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) में एआई की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से NLP तकनीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है।
प्रतिभागियों को प्रयोगात्मक सत्र के दौरान NLP टूल्स और मॉडल्स का अभ्यास भी कराया गया।
आर्डुइनो और क्लाउड इंटीग्रेशन पर व्यावहारिक सत्र
सी-डैक मोहाली के विशेषज्ञ रोहन धलोड़ ने द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ सत्रों का संचालन किया।
✅ द्वितीय सत्र:
विषय: आर्डुइनो यूनो के साथ IoT की नींव – प्रोग्रामिंग और क्लाउड इंटीग्रेशन
प्रतिभागियों को बताया गया कि आर्डुइनो यूनो के माध्यम से क्लाउड सेवाओं से कैसे जुड़ा जा सकता है।
इसके बाद प्रैक्टिकल सेशन में सभी ने इन तकनीकों को स्वयं लागू किया।
✅ तृतीय सत्र:
विषय: आईओटी कम्युनिकेशन – आर्डुइनो के साथ मॉड्यूल्स का इंटरफेसिंग
प्रतिभागियों ने जाना कि विभिन्न कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल्स का उपयोग कर आर्डुइनो को अन्य डिवाइसेज़ से कैसे जोड़ा जाता है।
रास्पबेरी पाई का तकनीकी उपयोग
अंतिम सत्र में रास्पबेरी पाई की कार्यप्रणाली और आईओटी में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञ रोहन धलोड़ और सी-डैक मोहाली के राहुल ने मिलकर रास्पबेरी पाई (ATM कार्ड साइज का कंप्यूटर) की तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी।
सम्मान और समापन
प्राचार्य प्रो. चंद्रशेखर ने सभी विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह भेंट किए और प्रतिभागियों को नई तकनीकों को अपनाने और उन्हें शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यों में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
निष्कर्ष:
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को उन्नत तकनीकी कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक प्रयोगात्मक विधियों से भी परिचित करवा रहा है।
राजकीय बहुततकनीकी महाविद्यालय, बड़ू-हमीरपुर में चल रहे पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का तीसरा दिन भी तकनीकी ज्ञान और प्रयोगात्मक गतिविधियों से समृद्ध रहा। इस दिन प्रतिभागियों के लिए एआई (AI) और आईओटी (IoT) से संबंधित विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।
एनएलपी और एआई पर पहला सत्र
एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप सिंह ने “प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) में एआई की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से NLP तकनीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है।
प्रतिभागियों को प्रयोगात्मक सत्र के दौरान NLP टूल्स और मॉडल्स का अभ्यास भी कराया गया।
आर्डुइनो और क्लाउड इंटीग्रेशन पर व्यावहारिक सत्र
सी-डैक मोहाली के विशेषज्ञ रोहन धलोड़ ने द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ सत्रों का संचालन किया।
✅ द्वितीय सत्र:
विषय: आर्डुइनो यूनो के साथ IoT की नींव – प्रोग्रामिंग और क्लाउड इंटीग्रेशन
प्रतिभागियों को बताया गया कि आर्डुइनो यूनो के माध्यम से क्लाउड सेवाओं से कैसे जुड़ा जा सकता है।
इसके बाद प्रैक्टिकल सेशन में सभी ने इन तकनीकों को स्वयं लागू किया।
✅ तृतीय सत्र:
विषय: आईओटी कम्युनिकेशन – आर्डुइनो के साथ मॉड्यूल्स का इंटरफेसिंग
प्रतिभागियों ने जाना कि विभिन्न कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल्स का उपयोग कर आर्डुइनो को अन्य डिवाइसेज़ से कैसे जोड़ा जाता है।
रास्पबेरी पाई का तकनीकी उपयोग
अंतिम सत्र में रास्पबेरी पाई की कार्यप्रणाली और आईओटी में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञ रोहन धलोड़ और सी-डैक मोहाली के राहुल ने मिलकर रास्पबेरी पाई (ATM कार्ड साइज का कंप्यूटर) की तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी।
सम्मान और समापन
प्राचार्य प्रो. चंद्रशेखर ने सभी विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह भेंट किए और प्रतिभागियों को नई तकनीकों को अपनाने और उन्हें शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यों में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
निष्कर्ष:
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को उन्नत तकनीकी कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक प्रयोगात्मक विधियों से भी परिचित करवा रहा है।