नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला स्तरीय नारको को-ऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की बैठक मंगलवार को उपायुक्त अमरजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिले में नशे की वर्तमान स्थिति, तस्करी के मामलों तथा रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों पर व्यापक चर्चा की गई। उपायुक्त ने कहा कि नशीले पदार्थों के सेवन और तस्करी पर शिकंजा कसने के लिए प्रदेश सरकार एक प्रभावी रणनीति को जमीनी स्तर पर लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस और अन्य विभागों के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से सुझाव आमंत्रित किए ताकि उन्हें राज्य स्तरीय एनकॉर्ड बैठक में रखा जा सके।
उपायुक्त ने बताया कि नशे के कारोबार या सेवन में संलिप्त व्यक्तियों की सूचना टॉल फ्री नंबर 112 या ‘ड्रग फ्री हिमाचल’ ऐप के माध्यम से दी जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। उन्होंने इन माध्यमों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित नशा उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं का समय रहते उपचार संभव हो सके। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श के लिए टेली मानस हेल्पलाइन 14416 का भी लाभ उठाया जा सकता है।
बैठक में जिला में नशे से जुड़े मामलों की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह ने बताया कि इस वर्ष अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 108 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा शिक्षण संस्थानों, हॉस्टलों और आसपास के क्षेत्रों में सतर्क निगरानी आवश्यक है। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक गर्ग सहित अन्य अधिकारियों ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। विभिन्न उपमंडलों के एसडीएम और पुलिस अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
