हमीरपुर में पेयजल गुणवत्ता पर सख्ती, डीसी के निर्देश

rakesh nandan

17/03/2026

जिला हमीरपुर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले में पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और नियमित रूप से पानी की सैंपलिंग एवं टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सभी जलस्रोतों की सफाई पर भी प्राथमिकता दी जाए और आम लोगों को भी इसके प्रति जागरूक किया जाए।

मंगलवार को जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने विभिन्न विभागों से हमीरपुर के स्वाहल क्षेत्र में हाल ही में सामने आए पीलिया के मामलों की ताजा स्थिति और इसके कारणों की विस्तृत रिपोर्ट भी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा।

उपायुक्त ने कहा कि जल शक्ति विभाग द्वारा संचालित स्रोतों, टैंकों और पाइपलाइनों के साथ-साथ पुराने प्राकृतिक जलस्रोतों की भी नियमित सफाई जरूरी है। इनमें बावड़ियां, कुएं, तालाब, खातरियां और अन्य पारंपरिक जल स्रोत शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन स्रोतों की अनदेखी से जल गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है।

इसके अलावा उन्होंने निर्देश दिए कि निजी बोरवेलों के पानी की भी नियमित जांच की जाए। कई क्षेत्रों में लोग निजी जल स्रोतों पर निर्भर हैं, इसलिए उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है जितना सरकारी जल आपूर्ति की निगरानी।

शिक्षा विभाग को निर्देश देते हुए उपायुक्त ने कहा कि सभी स्कूलों में पानी की टंकियों की नियमित सफाई की जाए और इसके लिए एक लॉगबुक भी मेंटेन की जाए। इस लॉगबुक में सफाई की तिथि और संबंधित विवरण दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने यह भी बताया कि जल शक्ति विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों, हाई स्कूलों, सीनियर सेकेंडरी स्कूलों, ग्राम पंचायतों और ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों को फील्ड टेस्टिंग किट्स उपलब्ध करवाई गई हैं। इन किट्स का उपयोग करते हुए सभी संस्थानों को नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।

उपायुक्त ने ग्राम पंचायतों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई सुनिश्चित करने के लिए खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से पंचायतों को विशेष निर्देश जारी किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर भी जल स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में डीडब्ल्यूएसएम के सचिव एवं जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता राकेश गर्ग ने मिशन की गतिविधियों और पेयजल टेस्टिंग की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विभाग 8 से 22 मार्च तक “जल महोत्सव” मना रहा है। इस अभियान के तहत जिले के सभी मंडलों में जलस्रोतों की सफाई की जा रही है और लोगों को स्वच्छ पेयजल के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी इस अभियान में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि जलजनित बीमारियों की रोकथाम में साफ पेयजल की अहम भूमिका होती है।

प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम जिले में पेयजल की गुणवत्ता सुधारने और जलजनित रोगों से बचाव के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो भविष्य में इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

अंत में, उपायुक्त ने सभी विभागों से अपील की कि वे इस दिशा में गंभीरता से काम करें और आम जनता भी जल स्वच्छता के प्रति जागरूक बने, ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सके।