जिला हमीरपुर में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत अब ₹1.5 लाख तक कैशलैस इलाज सुविधा शुरू की गई है। इस संबंध में उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस योजना का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे, इसके लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटना के बाद सरकारी अस्पतालों या आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले प्रत्येक घायल का डेटा तुरंत ऑनलाइन अपलोड किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि डेटा अपलोडिंग के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की देरी न हो और पीड़ितों को समय पर इलाज मिल सके।
उपायुक्त ने जानकारी दी कि यह सुविधा केवल उन्हीं मामलों में लागू होगी, जहां घायल व्यक्ति को सड़क दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इसके तहत मरीज का अधिकतम 7 दिनों तक कैशलैस इलाज किया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी सूचीबद्ध अस्पताल घायल व्यक्ति को भर्ती करने से मना नहीं कर सकता। यह व्यवस्था सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है, क्योंकि शुरुआती उपचार में देरी कई बार गंभीर परिणामों का कारण बनती है।
बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उपायुक्त ने बताया कि पक्का भरो चौक से कोहली तक मुख्य सड़क की मरम्मत के लिए ₹8.5 करोड़ और पक्का भरो से नादौन की ओर चील बाहल तक की सड़क के लिए लगभग ₹36 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क मरम्मत के साथ-साथ सभी बस स्टॉप्स पर बसों के लिए अलग बॉक्स मार्किंग की जाए, ताकि यातायात सुचारू रहे और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
इसके अलावा बैठक में सड़क सुरक्षा के अन्य उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इनमें प्रमुख रूप से:
- सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर स्पीड लिमिट, नो पार्किंग और डायवर्जन साइन बोर्ड लगाना
- आधुनिक तकनीक के स्पीड ब्रेकर स्थापित करना
- व्यस्त सड़कों पर पीक टाइम के दौरान वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करना
- जिला स्तर पर रोड सेफ्टी प्लान को मजबूत करना
उपायुक्त ने शिक्षण संस्थानों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी उपायुक्त ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और समय-समय पर उनकी जांच की जाए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह, एसडीएम संजीत सिंह और शशिपाल शर्मा, आरटीओ अंकुश शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी तथा पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों सहित अन्य विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कैशलैस इलाज सुविधा सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे इलाज में देरी नहीं होती और जीवन बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर, हमीरपुर में शुरू की गई यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।