भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत देशभर में करीब 1 करोड़ प्राचीन पांडुलिपियों और अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा। यह पहल देश की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस मिशन की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने अपने बजट भाषण में की थी। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
हिमाचल प्रदेश में भी इस मिशन को लेकर काम तेज़ हो गया है। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने बताया कि पहले राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तहत प्रदेशभर में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कराया गया था। अब उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ज्ञान भारतम मिशन के माध्यम से इन पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा।
भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रीमा कश्यप ने सभी जिला भाषा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे लोगों को इस मिशन के बारे में जागरूक करें और अधिक से अधिक पांडुलिपियों को इससे जोड़ें।
सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ज्ञान भारतम ऐप लॉन्च की है। इसके माध्यम से आम लोग भी घर बैठे अपनी पांडुलिपियों को डिजिटाइजेशन प्रक्रिया में शामिल कर सकते हैं। इसके लिए उपयोगकर्ता को मोबाइल पर ऐप डाउनलोड कर लॉगइन करना होगा और पांडुलिपि के कवर पेज के साथ-साथ अंदर के 2–3 पेज की फोटो अपलोड करनी होगी। इसके बाद संबंधित विभाग स्वयं पांडुलिपि के मालिक से संपर्क करेगा।
इस मिशन में वे पांडुलिपियां शामिल की जाएंगी जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हैं। इसमें हस्तलिखित दस्तावेज, ताड़पत्र और भोजपत्र पर लिखी पांडुलिपियां भी शामिल होंगी। सरकार का उद्देश्य घरों, मंदिरों और निजी संस्थानों में सुरक्षित प्राचीन ज्ञान को डिजिटल रूप में संरक्षित करना है।
ज्ञान भारतम मिशन के माध्यम से इन पांडुलिपियों को वैश्विक पहचान मिलेगी। इससे शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों और छात्रों को अध्ययन में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पांडुलिपियां उनके मालिकों के पास ही रहेंगी और केवल उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा खराब स्थिति में मौजूद पांडुलिपियों के संरक्षण की भी व्यवस्था की गई है। हिमाचल प्रदेश में राज्य संग्रहालय शिमला द्वारा केमिकल प्रक्रिया के माध्यम से इनका संरक्षण किया जाएगा, जिससे उनकी आयु बढ़ाई जा सके।
जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने आम जनता और निजी संस्थानों से अपील की है कि वे इस मिशन में भाग लें और अपने पास मौजूद पांडुलिपियों को डिजिटाइजेशन के लिए उपलब्ध करवाएं। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकेगा।