‘ज्ञान भारतम’ अभियान में पांडुलिपियों के पंजीकरण की अपील

rakesh nandan

16/05/2026

संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत देश की प्राचीन और अमूल्य पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई दुर्लभ पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का दस्तावेजीकरण, अभिलेखीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना है।

जिला भाषा अधिकारी Santosh Kumar Patial ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत में आज भी अनेक प्राचीन पांडुलिपियां निजी परिवारों, मंदिरों, मठों, संस्थाओं और विभिन्न समुदायों के पास सुरक्षित हैं। हालांकि इन अमूल्य धरोहरों का अब तक कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया है।

उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय ने अब इन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ‘ज्ञान भारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान शुरू किया है। इस अभियान के माध्यम से देशभर में उपलब्ध पांडुलिपियों का पंजीकरण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

संतोष कुमार पटियाल ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, संस्था या समुदाय के पास किसी भी प्रकार की पांडुलिपियां, हस्तलिखित ग्रंथ, पुराने दस्तावेज या ऐतिहासिक अभिलेख मौजूद हैं और उनका अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है, तो वे इसकी जानकारी जिला भाषा अधिकारी कार्यालय हमीरपुर को उपलब्ध करवा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे दस्तावेजों और पांडुलिपियों के पंजीकरण के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी ताकि इन ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने बताया कि कई बार लोगों के पास पीढ़ियों से संरक्षित दुर्लभ दस्तावेज होते हैं, लेकिन उनकी ऐतिहासिक महत्ता के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती।

जिला भाषा अधिकारी ने कहा कि ‘ज्ञान भारतम’ अभियान के तहत केवल सरकारी संस्थानों की ही नहीं बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस अभियान का उद्देश्य देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि अभियान के तहत लोग ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी ऑनलाइन सर्वेक्षण में भाग ले सकते हैं। इसके जरिए पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीकरण करवाया जा सकता है।

अधिकारियों के अनुसार इस अभियान से देश की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, साहित्य, इतिहास, धर्म, विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष और संस्कृति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। कई पांडुलिपियां ऐसी हैं जिनमें सदियों पुराना ज्ञान और ऐतिहासिक जानकारी सुरक्षित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की पांडुलिपि परंपरा विश्व की सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है। संस्कृत, हिंदी, फारसी, उर्दू और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में लिखी गई लाखों पांडुलिपियां देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

संतोष कुमार पटियाल ने कहा कि कई बार मौसम, देखभाल की कमी और समय के प्रभाव के कारण ये प्राचीन दस्तावेज नष्ट होने लगते हैं। ऐसे में उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण बेहद जरूरी हो जाता है।

उन्होंने जिले के सभी नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और साहित्य प्रेमियों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि लोग आगे आकर अपनी पांडुलिपियों का पंजीकरण करवाते हैं तो इससे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

जिला भाषा अधिकारी ने कहा कि यह अभियान केवल दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि उनके पास किसी भी प्रकार की पुरानी पांडुलिपि, हस्तलिखित पुस्तक, ऐतिहासिक दस्तावेज या पारंपरिक अभिलेख उपलब्ध हैं तो वे इसकी जानकारी संबंधित कार्यालय तक जरूर पहुंचाएं ताकि उनका रिकॉर्ड तैयार किया जा सके और उन्हें संरक्षित किया जा सके।