अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होने मंडी पहुंचे राज्यपाल
Shiv Pratap Shukla आज मंडी जिले के कंगनीधार हेलीपैड पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक और गरिमापूर्ण स्वागत किया गया। वे International Shivratri Festival Mandi के समापन समारोह में भाग लेने के लिए मंडी पहुंचे हैं।
कंगनीधार हेलीपैड पर स्वागत
राज्यपाल के आगमन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। स्वागत करने वालों में विधायक अनिल शर्मा, इंदर सिंह, पूर्ण चंद, नगर निगम के महापौर वीरेंद्र भट्ट, उपायुक्त अपूर्व देवगन और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे। इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी जानकी शुक्ला भी उनके साथ उपस्थित रहीं।
सर्किट हाउस में अभिनंदन
कंगनीधार हेलीपैड से सर्किट हाउस पहुंचने पर नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री Jai Ram Thakur ने राज्यपाल का अभिनंदन किया। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव आम सभा के अध्यक्ष एवं विधायक चंद्रशेखर, विधायक दीप राज तथा तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ललित अवस्थी सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी उनका स्वागत किया।
सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि
राज्यपाल आज आयोजित सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।
मंडी का अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव अपनी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इस महोत्सव में भाग लेकर मंडी की समृद्ध परंपराओं का अनुभव करते हैं।
समापन समारोह में सहभागिता
रविवार को राज्यपाल महोत्सव के भव्य समापन समारोह में भी शामिल होंगे। यह समारोह देव परंपरा, लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। मंडी, जिसे “छोटी काशी” के नाम से भी जाना जाता है, इस महोत्सव के माध्यम से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य करता है।
महोत्सव का महत्व
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव हिमाचल प्रदेश की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। राज्यपाल की उपस्थिति से महोत्सव की गरिमा और बढ़ गई है।
निष्कर्ष
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का मंडी आगमन और अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन समारोह में सहभागिता प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान और समर्थन का प्रतीक है। यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।