गोहर में प्राकृतिक खेती पर किसान गोष्ठी, 130 किसान शामिल

rakesh nandan

16/03/2026

कृषि विभाग द्वारा किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से मंडी जिले के गोहर विकास खंड में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय किसान गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कांडी पंचायत घर में आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन कृषि विभाग की ओर से कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) के माध्यम से किया गया।


130 किसानों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग

कार्यक्रम में सरोआ और कांडी पंचायतों के लगभग 130 उन्नतशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, इसके महत्व तथा इसके आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती की लागत में कमी आती है और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।


प्राकृतिक खेती को बताया लाभकारी

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राकेश पटियाल उपस्थित रहे, जो जिला मंडी में परियोजना निदेशक (आत्मा) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस पद्धति को अपनाकर किसान खेती की लागत कम कर सकते हैं और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत बना सकते हैं। उन्होंने किसानों को आत्मा परियोजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी दी और अधिक से अधिक किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।


विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने किसानों को अपने-अपने विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर

  • डॉ. हितेंद्र ठाकुर

  • डॉ. गगन प्रदीप सैनी

  • पुष्प राज

  • सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक मुरारी लाल और लक्की कश्यप

  • तुलसी राम ठाकुर

सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन, पशुपालन तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इसके अलावा पशु चिकित्सा अधिकारी और कृषि प्रसार अधिकारी ने भी किसानों को खेती और पशुपालन के बेहतर प्रबंधन के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना और उन्हें आधुनिक तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों से परिचित करवाना था। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है। इसके साथ ही यह खेती किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में भी सहायक हो सकती है।


किसानों ने दिखाई रुचि

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने भी प्राकृतिक खेती से संबंधित कई प्रश्न पूछे और अपने अनुभव साझा किए। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के सवालों के जवाब देते हुए उन्हें व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। किसानों ने इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।