हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत डुग्घा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा “वरिष्ठजनों हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना” के तहत “डिजिटल और वित्तीय साक्षरता” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल सेवाओं और वित्तीय लेन-देन के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें आधुनिक तकनीक के उपयोग के लिए सक्षम बनाना था।
कार्यक्रम में जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में प्रत्येक नागरिक के लिए तकनीकी जानकारी अत्यंत आवश्यक हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रयास कर रही है, ताकि उन्हें घर बैठे विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल सके।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर नागरिक अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश उपाध्याय ने साइबर सुरक्षा के विषय पर विशेष जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए साइबर अपराधों के बारे में भी लोगों को जागरूक किया और बताया कि किस प्रकार अपराधी लोगों को भ्रमित कर उनके साथ ठगी करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए और संबंधित साइबर सेल को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
इस अवसर पर एचडीएफसी बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक धीरज शर्मा ने डिजिटल भुगतान प्रणाली के विभिन्न माध्यमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम और अन्य डिजिटल सेवाओं के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि यह पारदर्शिता और सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है, बशर्ते इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने बैंकिंग सेवाओं, बचत योजनाओं, बीमा, पेंशन योजनाओं और सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि डिजिटल और वित्तीय साक्षरता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे न केवल नागरिक आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि वे धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया और इसे अत्यंत उपयोगी बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से उन्हें नई जानकारी मिलती है और वे आधुनिक तकनीक का उपयोग करने में अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं।
अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और समाज को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।