अनुराग शर्मा के खिलाफ चुनावी शिकायत दर्ज

rakesh nandan

09/03/2026

राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ औपचारिक शिकायत

अनुराग शर्मा, जो हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, उनके खिलाफ नामांकन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति का पूरा विवरण प्रस्तुत न करने और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई गई है। यह शिकायत निताशा कटोच, धर्मशाला की अधिवक्ता द्वारा दायर की गई है। शिकायत निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष प्रस्तुत की गई है।


7 मार्च को घोषित हुए थे निर्वाचित

शिकायत में बताया गया है कि अनुराग शर्मा, निवासी गांव बीड़, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा को 7 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया था। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि नामांकन पत्र के साथ दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्तियों का पूरा और सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। शिकायत में कहा गया है कि ऐसा करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है।


संपत्ति का पूरा विवरण देना अनिवार्य

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कानून के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करते समय अपनी तथा अपने परिवार की चल और अचल संपत्तियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होता है। यदि कोई जानकारी जानबूझकर छिपाई जाती है या गलत जानकारी दी जाती है तो यह चुनावी कानून का उल्लंघन माना जाता है। शिकायतकर्ता के अनुसार निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी की जांच के दौरान यह सामने आया कि कई भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में शामिल नहीं किया गया।


कई भूमि खातों का विवरण छिपाने का आरोप

दायर शिकायत में कहा गया है कि अनुराग शर्मा द्वारा कई भूमि खातों का उल्लेख नामांकन हलफनामे में नहीं किया गया।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल बताए गए क्षेत्र हैं:

  • जिला कांगड़ा के बैजनाथ क्षेत्र

  • मुल्थान क्षेत्र

  • जिला मंडी का जोगिंदरनगर क्षेत्र

शिकायत में इन भूमि खातों से संबंधित खाता नंबर और संबंधित गांवों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि यह जानकारी जानबूझकर छिपाई गई है तो यह गंभीर कानूनी मामला बन सकता है।


लाइसेंसी हथियार का विवरण भी अधूरा

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि संपत्ति के अलावा एक लाइसेंसी हथियार से संबंधित जानकारी भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में सही तरीके से प्रदर्शित नहीं की गई। इस प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव चुनावी हलफनामे की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।


सरकारी ठेकेदार होने का आरोप

शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि नामांकन दाखिल करते समय अनुराग शर्मा एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहे थे। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के लगभग 16 करोड़ रुपये के ठेके चल रहे थे और इनका कार्य प्रगति पर था। शिकायतकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A का हवाला देते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के पास सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध होता है तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।


प्रमाण पत्र जारी करने पर भी सवाल

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव द्वारा बहुत जल्दबाजी में प्रमाण पत्र जारी किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध लंबित हों तो प्रमाण पत्र जारी करने से पहले इस संबंध में पूरी जांच की जानी चाहिए थी। इस मामले को लेकर पूरी प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए गए हैं।


चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देना अपराध

अधिवक्ता निताशा कटोच ने अपनी शिकायत में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125A के तहत भी कार्रवाई योग्य बनता है। इस धारा के अनुसार चुनावी हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी देना दंडनीय अपराध माना जाता है।


निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।