मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताएं तय करने के उद्देश्य से दूसरे दिन के दूसरे एवं अंतिम सत्र में शिमला और कांगड़ा जिला के विधायकों के साथ विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डेटा स्टोरेज जैसे क्षेत्रों पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई क्रांतिकारी निर्णय लिए हैं। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जो दूध तथा प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं, जौ, मक्की और हल्दी पर सर्वाधिक समर्थन मूल्य प्रदान कर रहा है। इससे ग्रामीण आर्थिकी मजबूत होगी और लोगों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार आएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हालिया राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में हिमाचल प्रदेश 16 राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि वर्ष 2021 में राज्य 21वें स्थान पर था। उन्होंने बताया कि सरकार चिकित्सा संस्थानों में अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध करवा रही है तथा चमियाणा और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी सुविधा आरंभ की जा चुकी है। शीघ्र ही सभी मेडिकल कॉलेजों में यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि निवेशक हितैषी सुधारों के चलते हिमाचल प्रदेश केंद्र सरकार के बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान-2024 में टॉप एचीवर राज्य बना है। डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देते हुए राज्य को नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवा वितरण में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए पीपल फर्स्ट इंटीग्रेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से तैयार वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश का मानव विकास सूचकांक 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से कहीं अधिक है। यह सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य की प्रगतिशील नीतियों का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने विधायकों से आग्रह किया कि वे अपनी विकास योजनाओं की प्राथमिकताएं शीघ्र योजना विभाग को प्रस्तुत करें, ताकि उन्हें 2026-27 के बजट में सम्मिलित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश भी दिए तथा चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान को सफल बनाने के लिए विधायकों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
जिलावार विधायकों की प्रमुख मांगें
शिमला जिला
रोहड़ू से विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने सेब खरीद और दूध के समर्थन मूल्य में वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया और सीमा कॉलेज में बीएड कक्षाएं शुरू करने की मांग की।
शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा ने संपर्क मार्गों के लिए अलग बजट, पेयजल योजनाओं में तेजी और अंडरग्राउंड डक्ट निर्माण का मुद्दा उठाया।
कांगड़ा जिला
नूरपुर विधायक रणबीर निक्का ने मदर एंड चाइल्ड अस्पताल और अवैध खनन रोकने की मांग की।
इंदौरा विधायक मलेंद्र राजन ने बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा और तटीयकरण कार्य की मांग रखी।
जसवां-परागपुर विधायक बिक्रम सिंह ने सड़क परियोजनाओं और बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करने का आग्रह किया।
ज्वालामुखी विधायक संजय रतन ने हेलीपोर्ट, पॉलिटेक्निक और अस्पताल सुविधाएं बढ़ाने की मांग की।
सुलह विधायक विपिन सिंह परमार ने पुल निर्माण, अस्पताल व शैक्षणिक संस्थानों के कार्य शीघ्र पूरा करने की मांग की।
कांगड़ा विधायक पवन काजल ने शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर जोर दिया।
पालमपुर विधायक आशीष बुटेल ने पर्यटन, स्कूल व स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने का आग्रह किया।
बैजनाथ विधायक किशोरी लाल ने सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं और नई बसों की मांग रखी।
राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने बैठक में भाग लेने के लिए विधायकों का स्वागत किया।
बैठक में कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, एचपीटीडीसी अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।